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साइबर ठगी पर सख्ती: राजस्थान में बनेगा साइबर को-ऑर्डिनेशन सेंटर, AI और वॉइस फ्रॉड रोकने को सरकार का बड़ा एक्शन प्लान

राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है।

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एआई से बनाई गई तस्वीर

जयपुर। राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे साइबर फ्रॉड के मामलों को देखते हुए राज्य सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है। मोबाइल, कॉल, वॉइस नोट और डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से हो रही ठगी को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में राजस्थान साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर बनाने की घोषणा की है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट जयदीप दत्ता ने बताया कि आज के समय में साइबर फ्रॉड के तरीके तेजी से बदल रहे हैं। वॉइस नोट, कॉल और एआई बेस्ड तकनीक के जरिए लोगों को झांसे में लिया जा रहा है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम जरूरी है, क्योंकि एक ही प्लेटफॉर्म पर पुलिस, बैंक और टेक्निकल टीम के आने से ठगी के मामलों में तुरंत कार्रवाई संभव होगी।

आर फोर सी की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि यहां अलग-अलग एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। साइबर ठगी की शिकायत मिलते ही तुरंत तीन स्तर पर एक्शन शुरू होगा। टेक्निकल टीम ठग की लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट ट्रेस करेगी। बैंक अधिकारी तुरंत संबंधित खाते को ट्रैक कर उसे फ्रीज करेंगे ताकि पैसा आगे ट्रांसफर न हो सके। वहीं पुलिस टीम संबंधित थाने को जानकारी देकर तुरंत FIR और कानूनी कार्रवाई शुरू करवाएगी। इस मॉडल से साइबर अपराधियों पर तुरंत दबाव बनेगा और ठगी के मामलों में रिकवरी की संभावना भी बढ़ेगी।

275 लोगों की टीम, IG रैंक का अधिकारी संभालेगा कमान

इस सेंटर की कमान IG रैंक के अधिकारी के हाथ में होगी। उनके साथ एक बड़ी टीम तैनात रहेगी, जिसमें 1 DIG, 4 SP, 5 ASP और 7 DSP शामिल होंगे। इसके अलावा 8 इंस्पेक्टर और 7 टेक्निकल एक्सपर्ट भी टीम का हिस्सा होंगे। कुल मिलाकर 275 कार्मिकों की टीम 24 घंटे एक्टिव रहेगी, ताकि किसी भी समय आने वाली शिकायत पर तुरंत कार्रवाई हो सके।

AI के कारण नौकरी और ठगी दोनों में बड़ा बदलाव

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने जहां काम आसान किए हैं, वहीं चुनौतियां भी बढ़ी हैं। कई कंपनियां अब एडवांस स्किल्स पर फोकस कर रही हैं, जिससे मैनुअल टेस्टिंग जैसे काम करने वाले कर्मचारियों पर असर पड़ रहा है और छंटनी की स्थिति बन रही है। दूसरी तरफ यही AI साइबर ठगों के लिए नया हथियार बन गया है। वॉइस क्लोनिंग और ऑटोमेशन के जरिए लोगों को झांसे में लेना आसान हो गया है।

वॉइस नोट और OTP से रहें सावधान

जयदीप दत्ता ने बताया कि मोबाइल पर अनजान नंबर से आने वाले वॉइस नोट या लिंक बेहद खतरनाक हो सकते हैं। इन्हें ओपन करते ही फोन का डेटा चोरी हो सकता है और बैंक खाते से पैसे भी निकल सकते हैं।

उन्होंने बताया कि किसी भी स्थिति में बिना वेरिफिकेशन के OTP शेयर नहीं करना चाहिए। अब AI की मदद से लोगों की आवाज तक कॉपी की जा रही है, जिससे ठगी और आसान हो गई है।
जयदीप ने बताया कि जिस तरह साइबर फ्रॉड के मामले बढ़ रहे हैं, उससे साफ है कि जहां AI काम आसान बना रहा है, वहीं खतरे भी तेजी से बढ़ा रहा है।

AI पॉलिसी के साथ स्पेशल फोर्स भी तैयार

हाल ही में हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस समिट में राज्य सरकार ने नई AI पॉलिसी लॉन्च की है। इसके तहत साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से निपटने के लिए स्पेशल फोर्स बनाई जा रही है।
इस फोर्स में पुलिस, बैंक कर्मी और साइबर एक्सपर्ट शामिल होंगे, जो एक ही प्लेटफॉर्म पर काम करते हुए पीड़ितों को तुरंत मदद पहुंचाएंगे। R4C के बनने से साइबर ठगी के मामलों में तेजी से कार्रवाई संभव होगी। टेक्नोलॉजी, बैंकिंग और पुलिस के एक साथ आने से ठगों के लिए बच निकलना मुश्किल हो जाएगा, वहीं आम लोगों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।