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Rajasthan SI Recruitment 2021 : एसआई भर्ती रद्द होने पर ये क्या बोले सांसद हनुमान बेनीवाल? भजनलाल सरकार से कर दी ये मांग

नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने इस मुद्दे पर सीधा मोर्चा खोलते हुए इसे अपनी पार्टी के संघर्ष की जीत बताया है। बेनीवाल ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पुनर्गठन और राजनीतिक नियुक्तियों को खत्म करने की मांग को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया है।

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राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा SI भर्ती-2021 को निरस्त करने के ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। रालोपा (RLP) प्रमुख और सांसद हनुमान बेनीवाल ने कोर्ट की टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा है कि यह न्यायपालिका का एक सकारात्मक कदम है। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि पिछले 20-25 वर्षों में सरकारों ने अपने स्वार्थ के लिए RPSC में जो राजनीतिक नियुक्तियां की हैं, उन्होंने इस पवित्र संस्था की गरिमा को मिट्टी में मिला दिया है।

RPSC के 'दागी' सदस्यों को हटाने की प्रक्रिया हो शुरू

हनुमान बेनीवाल ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा की गई कड़ी टिप्पणियों का हवाला देते हुए कहा कि जिन RPSC सदस्यों पर पेपरलीक और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, उन्हें तुरंत पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। कोर्ट ने भी माना है कि परीक्षा से पहले आरपीएससी सदस्यों ने पेपर लीक किया था।

  • RLP का संघर्ष: बेनीवाल ने कहा कि RPSC के पुनर्गठन की मांग को लेकर उनकी पार्टी लंबे समय से आंदोलनरत है।
  • न्यायपालिका का रुख: कोर्ट की टिप्पणियां रालोपा के आंदोलन की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक मोड़ हैं।

'युवाओं का भविष्यकिया बर्बाद'

सांसद बेनीवाल ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विगत दो-ढाई दशकों में कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही सरकारों ने अपने चहेतों को RPSC में बैठाकर भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी की हैं।

  • गरिमा को ठेस: राजनीतिक नियुक्तियों के कारण संस्था की विश्वसनीयता खत्म हो गई है।
  • भ्रष्टाचार का केंद्र: बेनीवाल के अनुसार, RPSC अब प्रतिभाओं को चुनने के बजाय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गई है, जिसे अब साफ करने का समय आ गया है।

RPSC पुनर्गठन: अब सरकार की बारी

बेनीवाल ने राजस्थान की भजनलाल सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि न्यायपालिका की इन टिप्पणियों को गंभीरता से लेने की जरूरत है।

  • जल्द हो पुनर्गठन: सरकार को बिना समय गंवाए RPSC के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
  • पारदर्शिता की मांग: आयोग में नियुक्तियां योग्यता के आधार पर हों, न कि राजनीतिक सिफारिशों पर।

SI भर्ती रद्द होने के पीछे के बड़े कारण

हाईकोर्ट ने भर्ती रद्द करने के लिए जिन ठोस कारणों को आधार बनाया है, वे बेनीवाल के आरोपों की पुष्टि करते हैं:

  • बड़े पैमाने पर धांधली: एसओजी और एसआईटी की रिपोर्ट में व्यापक गड़बड़ी पाई गई है।
  • साक्ष्यों को नष्ट करना: इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को जानबूझकर हटाया गया ताकि दोषियों को बचाया जा सके।
  • अन्याय के खिलाफ फैसला: कोर्ट ने माना कि इस दूषित भर्ती को जारी रखना मेहनती युवाओं के साथ धोखा होगा।

अब आगे क्या हैं विकल्प?

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें आगामी कानूनी विकल्पों पर टिकी हैं:

  • सुप्रीम कोर्ट में चुनौती (SLP): पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता एस.एन. कुमावत और पूर्व न्यायाधीश अशोक गौड़ के अनुसार, अब हाईकोर्ट के बाद केवल सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने का ही विकल्प बचता है।
  • सरकार का रुख: राजस्थान के विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा है कि सरकार अभी हाईकोर्ट के आदेश का विस्तृत अध्ययन करेगी और उसके बाद ही तय किया जाएगा कि इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देनी है या नहीं।
  • दोषियों पर कार्रवाई: एडीजी एसओजी विशाल बंसल ने साफ किया है कि भर्ती रद्द होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।