जयपुर

Rajasthan Politics : राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव में देरी, राष्ट्रपति करें हस्तक्षेप : अशोक गहलोत  

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान में पंचायत और नगर निकाय चुनाव न कराए जाने पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इसे 'संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन' बताया है।उन्होंने इस मामले में राष्ट्रपति और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग करते हुए सरकार के सत्ता में बने रहने के नैतिक अधिकार पर सवाल उठाए हैं।
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Apr 14, 2026
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बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर राजस्थान की सियासत में संवैधानिक अधिकारों को लेकर नई जंग छिड़ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को अंबेडकर जयंती के मौके पर मीडिया से रूबरू होते हुए प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। गहलोत ने स्थानीय निकायों और पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाये और इसे 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है।

राष्ट्रपति और राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

राजस्थान के सियासी इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब गहलोत ने स्थानीय चुनावों के मुद्दे पर सीधे राष्ट्रपति और राज्यपाल को दखल देने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार अदालतों के आदेशों को दरकिनार कर रही है, तो संवैधानिक प्रमुखों की जिम्मेदारी बनती है कि वे हस्तक्षेप करें और लोकतंत्र की जड़ों यानी पंचायतों और निकायों को बचाएं।

पंचायत-निकाय चुनाव - AI Pic

चुनाव टालने को बताया 'संवैधानिक ब्रेकडाउन'

पूर्व मुख्यमंत्री ने राजस्थान में पंचायत, नगर निकाय और को-ऑपरेटिव संस्थाओं के चुनाव न होने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा-

  • अदालत की अवमानना: गहलोत ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट द्वारा स्पष्ट आदेश और अप्रैल की डेडलाइन दिए जाने के बावजूद सरकार चुनाव कराने से भाग रही है।
  • संस्थाओं की बर्बादी: पिछले 10 साल से को-ऑपरेटिव चुनाव नहीं हुए हैं और अब स्थानीय स्वशासन की संस्थाओं को भी बर्बाद किया जा रहा है। गहलोत ने कड़े शब्दों में कहा, "यह तो संविधान का ब्रेकडाउन है। जब सरकार संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जवाबदेह नहीं है, तो उसे सत्ता में रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।"

'अंबेडकर के उसूलों पर नहीं, केवल जयंती मनाने में विश्वास'

गहलोत ने कहा कि जो लोग आज सत्ता में हैं, उनका अंबेडकर साहब के संविधान में कभी विश्वास नहीं रहा, लेकिन वे आज दिखावे के लिए जयंती मना रहे हैं। उन्होंने कहा, "अंबेडकर साहब का योगदान इतिहास में दर्ज है, लेकिन आज उनकी (BJP) कथनी और करनी में बड़ा अंतर है। वे संविधान की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं और इसीलिए राहुल गांधी जी बार-बार 'संविधान बचाओ' की अपील कर रहे हैं।"

एजेंसियों और ज्यूडिशियरी पर भी चिंता

गहलोत ने केवल चुनावों तक सीमित न रहकर देश के मौजूदा हालातों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज ज्यूडिशियरी और केंद्रीय एजेंसियों की स्थिति देश में बहुत अजीब बन गई है। एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय दबाव में दिख रही हैं, जिससे लोकतंत्र कमजोर हो रहा है।

'सिर्फ दिखावे की राजनीति'

गहलोत ने तंज कसा कि भाजपा सरकार अंबेडकर साहब के उसूलों को ताक पर रखकर केवल प्रतीकात्मक राजनीति कर रही है। यदि सरकार को बाबा साहेब के संविधान में रत्ती भर भी यकीन होता, तो आज पंचायतों और नगरपालिकाओं में जनता के चुने हुए प्रतिनिधि होते, न कि प्रशासकों का राज।

Updated on:
14 Apr 2026 12:59 pm
Published on:
14 Apr 2026 12:59 pm