जयपुर

ईरानी युद्धपोत पर हमला : गहलोत बोले ‘जी हुजूरी’ ठीक नहीं, रणनीतिक चुप्पी भारत की साख पर उठा रही सवाल

ईरानी युद्धपोत पर हुए अमरीकी हमले को लेकर राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार की रणनीतिक चुप्पी को भारत की साख के खिलाफ बताया है।

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Mar 05, 2026
IRIS Dena (फोटो-@IN_HQENC)

जयपुर। हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर अमरीकी हमले के बाद भारत की कूटनीतिक प्रतिक्रिया को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए इसे भारत की रणनीतिक छवि से जुड़ा मुद्दा बताया है।

अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत की असली ताकत उसकी स्वतंत्र आवाज में है, न कि किसी की 'जी-हुजूरी' में। उन्होंने कहा कि भारत ने इतिहास में कभी किसी महाशक्ति के दबाव में झुककर अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं किया। गहलोत ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू द्वारा शुरू किए गए नॉन अलाइन मूवमेंट और इंदिरा गांधी की निडर कूटनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा स्वतंत्र रही है।

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'जैसे को तैसा' जवाब

उन्होंने 2013 के देवयानी खोबरागड़े विवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय मनमोहन सिंह की सरकार ने अमरीकी राजनयिकों की सुविधाएं वापस लेकर 'जैसे को तैसा' जवाब दिया था। गहलोत के मुताबिक भारत ने हमेशा अपने स्वाभिमान और संप्रभुता को प्राथमिकता दी है।

टॉरपीडो से हमला

दरअसल, मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 4 मार्च को हिंद महासागर में अमरीकीनौसेना ने ईरान के एक युद्धपोत पर टॉरपीडो से हमला कर उसे डुबो दिया। रिपोर्ट में बताया गया कि यह वही युद्धपोत था जिसने हाल ही में भारत की मेजबानी में हुए इंटरनेशनल फ्लीट रिविव 2026 और नौसैनिक अभ्यास MILAN 2026 में हिस्सा लिया था।

भारतीय नौसेना का मेहमान

ईरान के विदेश मंत्री सय्यद अब्बास अराघाची ने इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में 'अपराध' करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जिस युद्धपोत पर हमला हुआ, वह भारतीय नौसेना का मेहमान था और उस पर 130 नाविक सवार थे।

'अतिथि देवो भव' के खिलाफ

इसी मुद्दे को उठाते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि भारत खुद को हिंद महासागर का 'नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर' कहता है, लेकिन अपने समुद्री पड़ोस में हुई इस घटना पर रणनीतिक चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि 'अतिथि देवो भव' की परंपरा और सैन्य सम्मान के लिहाज से भारत को इस तरह की घटनाओं पर स्पष्ट रुख दिखाना चाहिए।

विपक्षी दल लगातार बना रहे निशाना

ईरानी युद्धपोत पर हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया को लेकर अब राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष जहां सरकार की चुप्पी पर सवाल उठा रहा है, वहीं इस पूरे घटनाक्रम को हिंद महासागर की बदलती रणनीतिक परिस्थितियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

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