
AI Traffic Monitoring: जयपुर. अब गाड़ी चलाते वक्त रेड लाइट जंपिंग, ओवर स्पीडिंग या लेन डिसिप्लिन तोड़ने पर इंसान नहीं, बल्कि AI आपको 'पकड़' लेगा। भारत में AI-बेस्ड ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम ने ट्रैफिक नियमों को तोड़ते ही रीयल-टाइम में वॉयलेशन डिटेक्ट कर ई-चालान काटना शुरू कर दिया है। यह तकनीक मैनुअल निगरानी की जगह ले रही है, जिससे गलतियां कम हो रही हैं और सड़क सुरक्षा मजबूत हो रही है।
स्मार्ट कैमरे अब सिर्फ रिकॉर्ड नहीं करते, बल्कि AI एनालिसिस से वाहन की हर हरकत पर नजर रखते हैं। ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक से नंबर पढ़ा जाता है, वॉयलेशन का प्रकार, समय, लोकेशन और फोटो/वीडियो के साथ डेटा ट्रैफिक डिपार्टमेंट को भेजा जाता है। अधिकारी कन्फर्मेशन के बाद NIC सिस्टम और mParivahan ऐप के जरिए ई-चालान जारी करते हैं।
यह सिस्टम दिल्ली, गुरुग्राम और पुणे जैसे शहरों में पहले से चल रहा है, जहां व्यस्त इंटरसेक्शन, हाईवे और फ्लाईओवर पर कैमरे लगे हैं। फायदे साफ हैं – प्रोसेस तेज, पारदर्शी और डेटा से हाई-वॉयलेशन जोन की पहचान आसान। इससे प्रशासन को पीक आवर्स और समस्या वाले इलाकों की जानकारी मिलती है, जिससे बेहतर प्लानिंग संभव हो रही है।
राजस्थान अब ट्रैफिक मैनेजमेंट में AI की ताकत से लैस हो रहा है। राज्य के प्रमुख शहरों में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के तहत AI कैमरे और सेंसर लगाकर रेड लाइट जंपिंग, ओवर स्पीडिंग, ट्रिपल राइडिंग जैसी गलतियों को रीयल-टाइम में पकड़ा जा रहा है। ई-चालान ऑटोमैटिक कट रहा है, जिससे मैनुअल चेकिंग की जरूरत कम हो रही है और सड़क सुरक्षा में बड़ा सुधार आ रहा है।
राजस्थान सरकार के DoIT&C (Department of Information Technology & Communication) के आधिकारिक प्रोजेक्ट के अनुसार, जयपुर, जोधपुर और कोटा में कुल 30 लोकेशन्स पर ITMS लागू है। यहां रेड लाइट वॉयलेशन डिटेक्शन (RLVD) और स्पीड वॉयलेशन डिटेक्शन सिस्टम काम कर रहे हैं। यह स्मार्ट सिटी इनिशिएटिव का हिस्सा है, जहां AI एनालिटिक्स ट्रैफिक मॉनिटरिंग, वॉयलेशन डिटेक्शन और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से इंटीग्रेटेड सर्विलांस सुनिश्चित कर रहा है। जयपुर में अतिरिक्त कैमरे लगाकर सिस्टम को और मजबूत किया गया है, जिससे चालान जारी करने की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हो गई है।
उदयपुर में यह क्रांति और आगे बढ़ चुकी है। फतेहपुरा इंटरसेक्शन पर AI-पावर्ड ट्रैफिक सिग्नल सिस्टम लॉन्च हो चुका है, जो हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और सेंसर से रीयल-टाइम ट्रैफिक डेंसिटी एनालाइज करता है। ग्रीन लाइट की टाइमिंग वाहनों की संख्या के आधार पर खुद एडजस्ट होती है – भीड़ वाली लेन को प्राथमिकता मिलती है, जाम कम होता है और समय की बचत होती है। यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर अन्य चौराहों पर विस्तारित किया जा रहा है।
यह राजस्थान में इंटेलिजेंट अर्बन ट्रांसपोर्ट की नई शुरुआत है। यह सब राजस्थान सरकार की स्मार्ट सिटी और ट्रैफिक ऑटोमेशन पहल के तहत हो रहा है, जिसमें AI पॉलिसी 2025 का महत्वपूर्ण योगदान है। राज्य स्तर पर Google जैसी कंपनियों के साथ पार्टनरशिप से AI-लेड सिस्टम पर फोकस है – जैसे प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, रीयल-टाइम डेटा और इमरजेंसी वाहनों को प्राथमिकता।
हालांकि पूर्ण AI इंटीग्रेशन अभी कुछ शहरों में पायलट या विस्तार स्टेज पर है, लेकिन तेजी से लागू हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिस्टम न केवल हादसों को कम करेगा, बल्कि ट्रैफिक फ्लो सुधारकर शहरों को और स्मार्ट बनाएगा। लेकिन डेटा प्राइवेसी और तकनीकी सुरक्षा पर भी ध्यान जरूरी है। कुल मिलाकर, राजस्थान में AI अब ट्रैफिक पुलिस की 'सुपर आंख' बन चुका है।