
राजस्थान भाजपा के वरिष्ठ नेता और बहरोड़ विधानसभा सीट से विधायक डॉ. जसवंत सिंह यादव का रविवार सुबह निधन हो गया। उन्होंने जयपुर स्थित एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार सोमवार को ग्राम सिलपटा में किया जाएगा। उनके निधन की खबर फैलते ही अलवर सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं में दुख का माहौल है। डॉ यादव के निधन पर भाजपा सहित अन्य राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने दुःख प्रकट किया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जारी अपने संदेश में लिखा, ''बहरोड़ विधायक डॉ. जसवंत यादव जी के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। दुख की इस घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिजनों एवं समर्थकों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति दें।''
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी पोस्ट में लिखा, ''पूर्व मंत्री एवं बहरोड़ विधायक डॉ. जसवंत यादव के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है। वे एक अनुभवी नेता थे और उनका लंबा सार्वजनिक जीवन रहा। कुछ माह पहले ,चेन्नई में स्वास्थ्य लाभ ले रहे डॉ. यादव से मेरी मुलाकात भी हुई थी। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों एवं उनके समर्थकों को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।''
केरलम राज्य के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर ने अपने शोक संदेश में लिखा, ''पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री , पूर्व जिला प्रमुख एवं वर्तमान में बहरोड़ से विधायक , वरिष्ठ नेता मेरे प्रिय डॉ. जसवंत यादव का निधन बेहद दुखद है । प्रभु उनको अपने धाम में स्थान दें । मेरी संवेदनाएँ उनके परिवार के साथ है । ॐ शांति
फिर 199 हुई विधानसभा सदस्यों की संख्या भाजपा विधायक डॉ जसवंत सिंह यादव के निधन के बाद कुल 200 सीटों वाली राजस्थान विधानसभा में विधायकों की संख्या एक बार फिर 199 हो गई है। बहरोड़ विधानसभा सीट अब आधिकारिक रूप से रिक्त घोषित हो गई है।
भारतीय चुनाव आयोग के नियमों (जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 151A) के तहत किसी भी विधायक या सांसद के निधन या इस्तीफा देने के बाद खाली हुई सीट पर 6 महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है। अब क्योंकि डॉ. जसवंत यादव का निधन 8 नवंबर 2026 को हुआ है, इसलिए नियम को ध्यान में रखा जाए, तो इस सीट पर मई 2027 से पहले उपचुनाव करा लिए जाएंगे।
बता दें कि आमतौर पर चुनाव आयोग देश के अन्य राज्यों में होने वाले चुनावों या लंबित उपचुनावों के साथ क्लब करके इसकी तारीखों का ऐलान करता है। ऐसे में फरवरी से अप्रैल 2027 के बीच बहरोड़ सीट पर मतदान होने की पूरी संभावना रहेगी।
राजस्थान विधानसभा में विधायकों की संख्या का 199 होना हर बार राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक पर चर्चा की वजह बनता है। दरअसल, राजस्थान के ज्योति नगर स्थित नए विधानसभा भवन के इतिहास में ये एक अजीब संयोग बना हुआ है, जिसे लेकर नेता और जनता दोनों के बीच कई तरह की चर्चाएं होती रहती हैं।
सबसे बड़ी चर्चा इसी बात की होती है कि विधानसभा के इस नए भवन में पिछले दो दशकों (साल 2001 के बाद) से कभी भी पूरे 5 साल तक सभी 200 विधायक एक साथ नहीं बैठ पाए हैं। जब भी आम चुनाव होते हैं, या तो शुरुआत में ही किसी सीट पर चुनाव टल जाता है, या फिर चुनाव के कुछ महीनों बाद किसी न किसी विधायक का असमय निधन हो जाता है, जिससे सदन की संख्या फिर से 199 हो जाती है।
राजनीतिक विश्लेषक इसे केवल एक दुखद संयोग मानते हैं, लेकिन अंधविश्वास पर यकीन करने वालों को इस बात से बल मिलता है कि हर सरकार के कार्यकाल में कई विधायकों की मौत हुई है।
15वीं विधानसभा (2018-2023): इस कार्यकाल के दौरान भंवरलाल शर्मा, कैलाश त्रिवेदी, किरण माहेश्वरी, गजेंद्र सिंह शक्तावत और मास्टर भंवरलाल मेघवाल जैसे 6 से ज्यादा दिग्गज विधायकों का अलग-अलग समय पर निधन हुआ, जिससे यह सीट कभी भी स्थाई रूप से 200 नहीं रह पाई।
वर्तमान 16वीं विधानसभा: अब हाल ही में बहरोड़ विधायक डॉ. जसवंत सिंह यादव के निधन के बाद यह चक्र दोबारा दोहराया गया है।