साल 1947 में जब देश का विभाजन हुआ, तो 20 वर्षीय युवा लालकृष्ण आडवाणी सिंध (कराची) छोड़कर दिल्ली पहुंचे थे। इसके तुरंत बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने उन्हें प्रचारक बनाकर राजस्थान भेज दिया। उन्होंने साल 1947 से 1952 तक राजस्थान के सुदूर और ग्रामीण इलाकों में संघ को मजबूत करने का काम किया। वे अलवर, भरतपुर, कोटा, बूंदी और झालावाड़ जिलों में साइकिल से घूम-घूमकर शाखाएं लगाया करते थे।