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कौन थे डॉ. जसवंत यादव? चार बार विधायक, एक बार सांसद और राजस्थान सरकार में रहे श्रम मंत्री, जानिए पूरा सफर

BJP MLA Jaswant Yadav Death: राजस्थान की राजनीति के वरिष्ठ नेता और बहरोड़ से भाजपा विधायक डॉ. जसवंत सिंह यादव का रविवार सुबह 8:15 बजे निधन हो गया। उन्होंने जयपुर के एक अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से अलवर सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
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अलवर

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kamlesh sharma

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Updated: 8 Nov 2026, 11:40 AM IST

Jaswant Singh Yadav

Behror BJP MLA Jaswant Yadav Passe Away(Photo-X/@madanrrathore)

BJP MLA Jaswant Yadav Death : अलवर। राजस्थान की राजनीति के वरिष्ठ नेता और बहरोड़ से भाजपा विधायक डॉ. जसवंत सिंह यादव का रविवार सुबह 8:15 बजे निधन हो गया। उन्होंने जयपुर के एक अस्पताल में उपचार के दौरान अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से अलवर सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके बेटे मोहित यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सोमवार को पैतृक गांव सिलपटा में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

डॉ. जसवंत यादव का राजनीतिक जीवन करीब चार दशक लंबा रहा। वे चार बार विधायक और एक बार सांसद रहे। राजस्थान सरकार में श्रम मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली। अलवर की राजनीति में उनकी पहचान एक प्रभावशाली नेता के रूप में रही। उनके निधन को भाजपा और क्षेत्र की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

शिलपटा गांव में हुआ जन्म, दिल्ली से की BMS की पढ़ाई

डॉ. जसवंत सिंह यादव का जन्म वर्ष 1953 में अलवर जिले के कोटकासिम क्षेत्र के शिलपटा गांव में हुआ था। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई गांव में ही की। इसके बाद अलवर के नवीन सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 12वीं तक शिक्षा प्राप्त की। कॉलेज की पढ़ाई अजमेर के रीजनल कॉलेज से की। बाद में दिल्ली से बीएमएस की पढ़ाई पूरी की।

उनकी राजनीतिक शुरुआत छात्र जीवन से हुई। वे दिल्ली विश्वविद्यालय में उपाध्यक्ष चुने गए। इसके बाद वर्ष 1985 में कांग्रेस से जुड़कर प्रदेश युवा कांग्रेस के उपाध्यक्ष बने। इसी साल उन्होंने मुंडावर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर, जिला प्रमुख भी बने

डॉ. यादव ने वर्ष 1990 में तिजारा विधानसभा सीट पर उपचुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें पूर्व मंत्री जगमाल सिंह से हार मिली। वर्ष 1993 में वे जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। इसके बाद वर्ष 1995 में कांग्रेस के टिकट पर जिला प्रमुख चुने गए।

वर्ष 1996 में उन्होंने लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमाई, लेकिन नवल किशोर शर्मा से हार गए। इसके बाद वर्ष 1998 में मुंडावर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, जिसमें भी उन्हें सफलता नहीं मिली।

1999 में पहली बार बने सांसद

लगातार चुनावी चुनौतियों के बीच वर्ष 1999 में डॉ. जसवंत यादव ने लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की। उन्होंने पूर्व सांसद महेंद्र कुमारी को हराकर संसद में जगह बनाई। इसके बाद वर्ष 2004 में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बहरोड़ विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ा, लेकिन इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

2008 में भाजपा में आए, लगातार दो बार बने विधायक

वर्ष 2008 में डॉ. जसवंत यादव ने भाजपा के टिकट पर बहरोड़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद वर्ष 2013 में भी भाजपा के टिकट पर इसी सीट से विधायक चुने गए। राजस्थान में भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान उन्हें श्रम मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। मंत्री रहते हुए उन्होंने श्रम विभाग से जुड़े कामकाज की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2023 में उन्होंने तीसरी बार बहरोड़ से फिर जीत दर्ज कर विधानसभा में वापसी की थी।