जयपुर

राजस्थान कांग्रेस के सांसद भजन लाल जाटव को AICC ने दी बड़ी ज़िम्मेदारी, पंजाब में सुलझाएंगे अंदरूनी कलह और गुटबाजी

कांग्रेस आलाकमान का बड़ा फैसला। राजस्थान के करौली-धौलपुर सांसद भजन लाल जाटव को बनाया पंजाब का AICC पर्यवेक्षक। अजय माकन और मीनाक्षी नटराजन के साथ सुलझाएंगे अंदरूनी कलह।

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Jun 12, 2026
Bhajan Lal Jatav Appointed Punjab Congress AICC Observer Big Responsibility
Bhajan Lal Jatav, Rahul Gandhi and Mallikarjun Kharge - File PIC

राजस्थान के करौली-धौलपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस सांसद भजन लाल जाटव का राष्ट्रीय राजनीति में कद लगातार बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस आलाकमान ने पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे संकट और आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर एक बड़ा कदम उठाया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की सहमति से पंजाब की राजनीतिक जमीनी हकीकत जानने के लिए 3 सदस्यीय उच्च स्तरीय एआईसीसी पर्यवेक्षक टीम का गठन किया है, जिसमें राजस्थान के सांसद भजन लाल जाटव को मुख्य रूप से शामिल किया गया है। इस विशेष टीम में सांसद भजन लाल जाटव के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय माकन और अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मीनाक्षी नटराजन जैसी राष्ट्रीय स्तर की हस्तियां शामिल हैं।

कांग्रेस आलाकमान ने इन तीनों दिग्गजों को तत्काल प्रभाव से पंजाब का दौरा करने और वहां की वास्तविक राजनीतिक परिस्थितियों का गहराई से आकलन करके एक विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट अति शीघ्र कांग्रेस नेतृत्व को प्रस्तुत करने के निर्देश जारी किए हैं।

सुलझाएंगे अंदरूनी कलह और गुटबाजी

कांग्रेस आलाकमान द्वारा उठाए गए इस कदम का सबसे बड़ा रणनीतिक पहलू यह है कि इस 3 सदस्यीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही पंजाब कांग्रेस के भविष्य का खाका तैयार किया जाएगा। वर्तमान में पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहे सांगठनिक बदलावों की सुगबुगाहट के बीच भजन लाल जाटव की भूमिका बेहद निर्णायक हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस जांच और जमीनी आकलन रिपोर्ट के आधार पर ही पंजाब में नए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और विधानसभा में नए नेता प्रतिपक्ष की आधिकारिक नियुक्ति की जाएगी। दिल्ली के सियासी गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने भजन लाल जाटव की सांगठनिक क्षमता और उनके जमीनी जुड़ाव को देखते हुए ही उन्हें पंजाब जैसे बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण राज्य के नेताओं के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए चुना है, ताकि वे बिना किसी स्थानीय दबाव के एक पूरी तरह से निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार कर सकें।

आखिर क्यों पड़ी पंजाब में पर्यवेक्षकों की जरूरत?

पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रहा मौजूदा संकट कोई नया नहीं है, लेकिन अगले साल की शुरुआत में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण समय बेहद कम बचा है। इस फैसले के पीछे पंजाब की मुख्य राजनीतिक परिस्थितियां सीधे तौर पर जिम्मेदार मानी जा रही हैं:

  • आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी: पंजाब में अगले साल के शुरुआती महीनों में ही नए विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव में बहुत कम समय बचा होने के कारण कांग्रेस आलाकमान किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। राहुल गांधी इस सुधारात्मक कदम के जरिए चुनाव से पहले पूरी सांगठनिक कमियों को दूर करना चाहते हैं।
  • गुटबाजी और आधा दर्जन सीएम पद के दावेदार: पंजाब कांग्रेस के भीतर इस समय भयंकर अंदरूनी कलह और गुटबाजी चरम पर चल रही है। आंतरिक रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में मुख्यमंत्री पद के लिए कम से कम 6 से अधिक बड़े और रसूखदार दावेदार आपस में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और एक-दूसरे के खिलाफ लॉबिंग में जुटे हैं। इस गुटबाजी को शांत कर सभी को एक मंच पर लाना भजन लाल जाटव की टीम का मुख्य टास्क है।
  • स्थानीय निकाय चुनावों में करारी हार का झटका: हाल ही में पंजाब में संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक और चिंताजनक रहा है। इसके विपरीत, राज्य की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने एकतरफा बड़ी जीत दर्ज की है। इस करारी हार ने कांग्रेस आलाकमान को जमीनी स्तर पर संगठन के पुनर्निर्माण के लिए पूरी तरह से विवश कर दिया है।
  • AAP की मजबूती और BJP की बढ़ती सक्रियता: राज्य में जहां अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी लगातार अपने पैर मजबूत कर रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी भी विपक्षी खेमे में बड़ी सेंधमारी कर अपना जनाधार बढ़ाने की पुरजोर कोशिश कर रही है। इसके साथ ही, 'इंडिया ब्लॉक' के तहत स्थानीय स्तर पर सीटों के तालमेल को लेकर पंजाब कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच भारी मतभेद उभरकर सामने आए हैं।

भजन लाल जाटव : सांसद बनने तक का पूरा राजनीतिक सफर

पंजाब कांग्रेस के संकट को सुलझाने के लिए चुने गए भजन लाल जाटव राजस्थान की राजनीति का एक बेहद सादगीपसंद और जमीनी चेहरा माने जाते हैं। उनका राजनीतिक जीवन पूरी तरह से ग्रामीण परिवेश और किसान पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है-

  • पारिवारिक पृष्ठभूमि और व्यक्तिगत जीवन: भजन लाल जाटव का जन्म 12 अक्टूबर 1968 को राजस्थान के भरतपुर जिले के वैर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले झालाटाला गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री गुलकन्दी लाल है और वे खुद को हमेशा एक साधारण किसान परिवार से जुड़ा हुआ बताते हैं।
  • विधायक और कैबिनेट मंत्री का सफर: वे भरतपुर जिले की वैर विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर लगातार 2 बार विधायक (MLA) रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार में वे सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के बेहद महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री थे। इसके अलावा उन्होंने गृह रक्षा, नागरिक सुरक्षा, कृषि और पशुपालन जैसे बड़े विभागों में राज्यमंत्री के रूप में भी बेहतरीन सेवाएं दी थीं।
  • 2023 की हार और 2024 की ऐतिहासिक जीत: हालांकि, 2023 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में उन्हें अपनी वैर सीट से नजदीकी हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन कांग्रेस आलाकमान ने उनकी लोकप्रियता को देखते हुए 2024 के लोकसभा चुनाव में उन पर दोबारा भरोसा जताया और करौली-धौलपुर अनुसूचित जाति (SC) आरक्षित संसदीय सीट से चुनावी मैदान में उतारा।
  • 98,945 वोटों का बड़ा चुनावी अंतर: 2024 के लोकसभा चुनाव में भजन लाल जाटव ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मजबूत उम्मीदवार इन्दु देवी जाटव को करारी शिकस्त दी। उन्होंने यह चुनाव 98,945 वोटों के एक बेहद बड़े और ऐतिहासिक अंतर से जीतकर 18वीं लोकसभा में करौली-धौलपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व संभाला।
Published on:
12 Jun 2026 08:47 am