जयपुर

Rajasthan BJP : ‘पार्टी विद डिफरेंस’ में फिर ‘परिवारवाद’! इन नेता पुत्रों को ‘प्रमोशन’ के साथ मिली बड़ी ज़िम्मेदारी

भाजयुमो राजस्थान की नई कार्यकारिणी में 'परिवारवाद', बड़े नेताओं के बेटों को मिले बड़े पद। नारी शक्ति वंदन के दावों के बीच 63 में से सिर्फ 3 महिलाओं को मिली जगह।

4 min read
May 23, 2026
BJP - AI PIC

भारतीय जनता पार्टी के युवा संगठन 'भाजयुमो' की नई राजस्थान प्रदेश कार्यकारिणी चर्चा में है। ये कार्यकारिणी 21 और 22 मई दरम्यानी आधी रात को प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा द्वारा घोषित की गई। ख़ास बात ये है कि जिस 'परिवारवाद' के मुद्दे पर BJP मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को लगातार घेरती है, अब वही 'परिवारवाद' भाजपा युवा मोर्चा की इस नई टीम पर पूरी तरह हावी होता दिखाई दे रहा है। इस सूची को देखने के बाद जमीनी कार्यकर्ता गहरे अचरज में हैं।

इन नेता पुत्रों की चमकी किस्मत

भाजयुमो की इस नई नवेली 63 सदस्यीय कार्यकारिणी को अगर ध्यान से खंगाला जाए, तो इसमें साधारण घरों से आने वाले जुझारू युवाओं के नाम ढूंढने से भी नहीं मिल रहे हैं, जबकि बड़े राजनीतिक परिवारों के बेटों का दबदबा साफ नजर आ रहा है।

शिवराज सिंह (प्रदेश उपाध्यक्ष): अजमेर के बेहद रसूखदार और दिग्गज भाजपा नेता भंवर सिंह पलाड़ा के बेटे शिवराज सिंह को संगठन में सीधे 'प्रदेश उपाध्यक्ष' जैसे मलाईदार और बेहद ताकतवर पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।

शिवराज सिंह

आदित्य सिंघानिया (प्रदेश मंत्री): शेखावाटी के बड़े भाजपा नेता और सीकर के पूर्व जिलाध्यक्ष मनोज सिंघानिया के बेटे आदित्य सिंघानिया को सीधे 'प्रदेश मंत्री' के पद पर प्रमोट कर दिया गया है।

आदित्य सिंघानिया

दिव्यांश भारद्वाज (प्रदेश मंत्री): पूर्व मुख्यमंत्री और बड़े नेताओं के पूर्व मीडिया सलाहकार रहे महेंद्र भारद्वाज के बेटे दिव्यांश भारद्वाज को भी प्रदेश मंत्री का महत्वपूर्ण जिम्मा मिला है। हालांकि दिव्यांश पहले टोंक की आंवा ग्राम पंचायत में सरपंच रह चुके हैं, लेकिन उनके इस डायरेक्ट प्रमोशन के पीछे उनके पिता के ऊंचे सियासी रसूख को ही मुख्य वजह माना जा रहा है।

दिव्यांश भारद्वाज

'नारी शक्ति वंदन' के दावों की खुली पोल!

इस नई कार्यकारिणी का सबसे हैरान करने वाला और 'आउट ऑफ द बॉक्स' पहलू यह है कि एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की भजनलाल सरकार देश की संसद, विधानसभाओं और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए बड़े-बड़े कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) पास कराती हैं, लेकिन जब खुद के संगठन में महिलाओं को सम्मान देने की बात आई, तो भाजपा युवा मोर्चा पूरी तरह बैकफुट पर नजर आया।

संगठनात्मक मापदंड (Parameters)भाजपा का राष्ट्रीय एजेंडा / दावाभाजयुमो राजस्थान की वास्तविक हकीकतहकीकत में कितनी बची 'कमी' (Shortfall)जमीनी कार्यकर्ताओं और महिलाओं की प्रतिक्रिया
कुल सदस्य संख्यासंगठन का वृहद स्वरूप63 सदस्यीय कार्यकारिणी--इतने बड़े संगठन में महिलाओं की भारी अनदेखी से महिला विंग में गहरी नाराजगी।
महिला कार्यकर्ताओं की संख्यामहिलाओं को अग्रणी नेतृत्वकेवल 3 महिला कार्यकर्ता--निकिता शेखावत, ट्विंकल शर्मा और सुश्री वृंदा राठौड़ को छोड़कर कोई बड़ी जगह नहीं।
33% महिला आरक्षण के नियम सेन्यूनतम 33% भागीदारी अनिवार्य21 महिलाओं को मिलनी थी जगह18 महिला पदों की भारी कटौतीसंगठन के भीतर ही यह चर्चा तेज है कि कथनी और करनी में इतना बड़ा अंतर क्यों है?


कट्टा-कारतूस केस वाले 'कुशवाह' को प्रदेश मंत्री का पद

इस नई लिस्ट के जारी होने के बाद सिर्फ 'परिवारवाद' ही नहीं, बल्कि दागी चेहरों को संगठन में जगह दिए जाने को लेकर भी तीखे सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया से लेकर पार्टी के अंदरूनी वाट्सएप ग्रुप्स में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा बी. के कुशवाह को 'प्रदेश मंत्री' बनाए जाने को लेकर हो रही है।

बी. के कुशवाह

क्या है पुराना मामला? बी. के कुशवाह के ऊपर पूर्व में कथित तौर पर अवैध देसी कट्टा और जिंदा कारतूस रखने के मामले में पुलिसिया कार्रवाई की जा चुकी है और वे पकड़े भी जा चुके हैं। ऐसे में एक छात्र संगठन से जुड़े रहे और इस तरह के गंभीर विवादों में घिरे चेहरे को प्रदेश स्तर की टीम में मंत्री बनाना हर किसी के गले नहीं उतर रहा है।

बागी चेहरों को भी तरजीह: इसके साथ ही, इस लिस्ट में छात्र राजनीति (ABVP) के दौरान अपनी ही पार्टी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद करने वाले कई बागी नेताओं को भी महत्वपूर्ण पदों पर बिठा दिया गया है, जिससे सालों से अनुशासित रहकर काम करने वाले कैडर में भयंकर हताशा है।

भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा की सफाई

शंकर गोरा

जब इस पूरी सूची को लेकर चारों तरफ से विरोध के सुर उठने लगे और बात आलाकमान तक पहुंची, तो भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष शंकर गोरा (Shankar Gora) खुद डैमेज कंट्रोल के लिए मैदान में उतरे। उन्होंने इन तमाम आरोपों और विवादों पर अपनी सफाई देते हुए बेहद नपा-तुला बयान जारी किया है।

शंकर गोरा का आधिकारिक बयान: "बी. के कुशवाह के जिस मामले को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, हमने उसकी पूरी तरह से जांच-पड़ताल की है। वे माननीय अदालत से उस मामले में पूरी तरह बरी (Acquitted) हो चुके हैं। पार्टी में जो भी युवा कार्यकर्ता रात-दिन सक्रिय रहकर संगठन का काम कर रहे हैं, बिना किसी भेदभाव के सिर्फ उन्हें ही मौका दिया गया है। रही बात महिलाओं के प्रतिनिधित्व की, तो हमारी इस कार्यकारिणी में समय-समय पर आगे भी योग्य और जुझारू महिला कार्यकर्ताओं को शामिल किया जाता रहेगा।"

ये भी पढ़ें

Rajasthan BJYM : ऊपर से लेकर नीचे तक बदल गई BJP युवा मोर्चे की कोर टीम, यहां देखें नए नेताओं की Jumbo List
Updated on:
23 May 2026 02:09 pm
Published on:
23 May 2026 02:04 pm
Also Read
View All