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Ashok Gehlot : अचानक ‘आक्रामक’ हुए पूर्व CM, 24 घंटे में 4 बड़े मुद्दों पर ‘वार’, टारगेट पर भजनलाल सरकार

पूर्व सीएम अशोक गहलोत का बड़ा सियासी धमाका, 24 घंटे में पेट्रोल-डीजल, NEET पेपर लीक, पंचायत चुनाव और विकास चौपाल पर भजनलाल सरकार को घेरा। जानें राजस्थान की राजनीति का सबसे बड़ा अपडेट।

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Ex CM Ashok Gehlot and CM Bhajan Lal Sharma

Ex CM Ashok Gehlot and CM Bhajan Lal Sharma

राजस्थान की सियासत में आज 'वीकेंड' शनिवार 23 मई का दिन बेहद सरगर्मियों भरा रहा। खासतौर से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अचानक बेहद आक्रामक मुद्रा में आ गए। गहलोत ने एक के बाद एक, कुल चार ऐसे बड़े मुद्दों पर सीधे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा संगठन पर तीखे तीर छोड़े हैं, जिन्होंने राजस्थान से लेकर दिल्ली तक के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गहलोत का यह चौतरफा हमला बेहद सधा हुआ, क्रोनोलॉजिकल और सीधे जनता की नब्ज पर हाथ रखने वाला है।

चाहे बात पेट्रोल पंपों पर लगती मंहगाई की आग हो या फिर युवाओं के भविष्य से जुड़ा NEET पेपर लीक का गंभीर मामला- गहलोत ने हर मोर्चे पर सूबे की सरकार की प्रशासनिक विफलता को जनता की अदालत में लाकर खड़ा कर दिया है। आइए गहराई से समझते हैं पूर्व सीएम के इन 4 बड़े हमलों की पूरी इनसाइड स्टोरी।

मुद्दा नंबर 1: पेट्रोल-डीज़ल कीमतों में वृद्धि

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मरुधरा में लगातार बढ़ रही तेल की कीमतों को लेकर जनता के गुस्से को सीधे अपनी आवाज दी है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब भी देश या अंतरराष्ट्रीय बाजार के चलते तेल कंपनियां दाम बढ़ाती हैं, तो राजस्थान सरकार का वैट (VAT) प्रतिशत पर आधारित होने के कारण स्वतः ही बढ़ जाता है। यानी जनता की जेब कटती है और सरकार की तिजोरी में बिना कुछ किए मुनाफा भर जाता है।

गहलोत के इस पहले बड़े हमले के मुख्य बिंदु :

अन्नदाता किसानों पर दोहरी मार: डीजल की हर बढ़ती कीमत सीधे ट्रैक्टर, ट्यूबवेल और कृषि इनपुट्स की लागत बढ़ा देती है। इससे राजस्थान का किसान पूरी तरह कर्ज के जाल में धंस रहा है।

गुजरात-हरियाणा मॉडल पर सवाल: विपक्ष में रहते हुए जो भाजपा वैट कम करने के लिए सड़कों पर प्रदर्शन करती थी, आज वही भाजपा सत्ता में आने के बाद चुप्पी साधे बैठी है। राजस्थान में आज भी वैट पड़ोसी राज्य हरियाणा और गुजरात के मुकाबले कहीं अधिक है।

सीएम भजनलाल से सीधी मांग: गहलोत ने सोशल मीडिया पर ट्वीट कर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधे मांग की है कि सरकार अपना अतिरिक्त राजस्व का लालच छोड़े और पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट व रोड सेस में तुरंत भारी कटौती कर जनता को इस कमरतोड़ मंहगाई से तत्काल राहत दे।

मुद्दा नंबर 2: 'ग्राम विकास चौपाल' का विरोध !

भजनलाल सरकार द्वारा ग्रामीण इलाकों में फीडबैक लेने और योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए शुरू किए गए 'ग्राम विकास चौपाल' और 'ग्राम विकास रथ' अभियानों को अशोक गहलोत ने मात्र एक 'छवि चमकाने का सरकारी तमाशा' करार दिया है।

गहलोत ने कहा राजस्थान में भाजपा सरकार द्वारा आयोजित की जा रही 'ग्राम विकास चौपाल' ग्रामीण समस्याओं का फीडबैक लेने एवं उनके समाधान का एक अच्छा अवसर थी। परन्तु सरकार ने इसे केवल छवि चमकाने का अभियान बना दिया है। इन चौपालों में जहां सभी ग्रामीणों को बुलाया जाना चाहिए था, उनकी समस्याएं सुनकर हल करना चाहिए था , वहां केवल भाजपा कार्यकर्ताओं और योजनाओं के लाभार्थियों को ही आमंत्रित किया जा रहा है, ताकि सरकार की कोई आलोचना न सुननी पड़े। ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री जी में अपनी सरकार की आलोचना सुनने एवं जनता की समस्याओं से रूबरू होने का माद्दा नहीं है जिसके कारण यह ग्राम विकास चौपाल की बजाय 'चुनिंदा लोगों की चौपाल' बन कर रह गई है।

इसी प्रकार, 'ग्राम विकास रथ' तो मात्र मजाक का पात्र बन कर रह गए हैं। ढाई साल में सरकार ने एक भी ऐसा काम नहीं किया जिससे प्रदेश की जनता को बड़े स्तर पर लाभ हो, परन्तु विकास रथ रवाना कर दिए गए, जिनका गांवों में विरोध हो रहा है। पहले ग्रामीण और शहरी सेवा शिविर और अब विकास रथ, भाजपा सरकार के ये सभी अभियान विफल होते जा रहे हैं। भाजपा सरकार को जनहित में आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों पैदा हो रही है।

मुद्दा नंबर 3: पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट के आदेश

अशोक गहलोत ने तीसरा और सबसे कानूनी प्रहार राजस्थान में अटके पड़े पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर किया है। हाल ही में उच्च न्यायालय (High Court) द्वारा सरकार के तमाम बहानों को खारिज करते हुए 31 जुलाई 2026 तक हर हाल में चुनाव कराने के आदेश को गहलोत ने लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत और भजनलाल सरकार की करारी प्रशासनिक हार बताया है।

हाईकोर्ट के आदेश पर गहलोत का तीखा बयान: "भाजपा सरकार किसी भी कीमत पर जनता का सामना करने से कतरा रही थी, इसलिए वे पंचायत चुनाव से लगातार भाग रहे थे। चुनाव टालने के लिए सरकार ने कोर्ट के सामने बेहद बचकाने और हास्यास्पद बहाने बनाए— कभी कहा गया कि भीषण गर्मी और लू चल रही है, कभी नए स्कूल सत्र का बहाना लिया गया, तो कभी बारिश का रोना रोया गया। इससे पहले भी न्यायालय ने 15 अप्रैल तक चुनाव कराने को कहा था, लेकिन इस संविधान विरोधी सरकार ने कोर्ट की अवहेलना की। अब इनके भागने के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं, इन्हें जनता के सामने जाना ही होगा और मरुधरा की जनता इस मिस-गवर्नेंस, भ्रष्टाचार और लापरवाही का वोट की चोट से करारा जवाब देगी।"

मुद्दा नंबर 4: NEET पेपर लीक कांड

चौथा और सबसे विस्फोटक हमला गहलोत ने देश और राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाले NEET पेपर लीक मामले पर किया है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अध्यक्ष प्रदीप जोशी द्वारा संसदीय समिति के सामने दिए गए उस बयान पर गहलोत भड़क उठे, जिसमें जोशी ने कहा था कि वे नहीं मानते कि पेपर लीक हुआ था।

गहलोत ने इस मामले में सीधे तौर पर 'डबल स्टैंडर्ड' और 'राजनीतिक संरक्षण' के गंभीर आरोप लगाए हैं:

विरोधाभासी रुख: एक तरफ खुद एनटीए ने गड़बड़ी के चलते कई जगहों पर पेपर और ग्रेस मार्क्स को लेकर री-एग्जाम और कड़े कदम उठाने की बात की, दूसरी तरफ उनके अध्यक्ष संसदीय समिति के सामने इतना गैर-जिम्मेदाराना बयान देकर धांधली को छिपाने का प्रयास कर रहे हैं।

जयपुर का महा-घेराव: गहलोत ने याद दिलाया कि कल ही जयपुर की सड़कों पर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के नेतृत्व में हजारों छात्रों और युवाओं ने कलेक्ट्रेट और प्रशासनिक दफ्तरों का ऐतिहासिक घेराव किया, लेकिन सरकार और प्रशासन कुंभकर्णी नींद सो रहे हैं।

बुलडोजर कार्रवाई पर दोहरा मापदंड: गहलोत ने सबसे बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए कहा कि भाजपा सरकारें अमूमन हर छोटे-मोटे मामले में आरोपियों के घरों पर तुरंत सरकारी बुलडोजर भेज देती हैं, लेकिन NEET पेपर लीक में चूंकि खुद भाजपा और विचार परिवार से जुड़े बड़े नेताओं के नाम और उनके तार सामने आ रहे हैं, इसलिए आज तक कोई सख्त या बुलडोजर वाली कार्रवाई नहीं की गई। यह साफ दिखाता है कि इस महा-घोटाले को ऊंचे स्तर पर संरक्षण प्राप्त है।