
Encroachment Removed From Kanota Jaipur: जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण और सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत कानोता कस्बे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। सुबह करीब 9.30 बजे शुरू हुआ अभियान शाम 4 बजे तक चला। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने जेसीबी और बुलडोजर की मदद से 111 प्रतिष्ठानों के आगे किए गए अस्थायी और स्थायी अतिक्रमण हटाए। जिनमें सड़क सीमा में आ रहे करीब 60 दुकान-मकानों के हिस्सों को भी नियमानुसार ध्वस्त किया गया।
कार्रवाई की शुरुआत जयपुर के कानोता थाना परिसर की चारदीवारी से हुई। इसके बाद मुख्य बाजार और राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे अतिक्रमण हटाए गए। पूर्व में नोटिस मिलने के कारण अधिकांश दुकानदारों और भवन मालिकों ने स्वयं ही टिनशेड, बोर्ड, चबूतरे, शटर, छज्जे, छतों पर लगी पट्टियां और अन्य सामान हटा लिया था। शेष निर्माण जेसीबी की मदद से हटाए गए। कार्रवाई के दौरान बस्सी तहसीलदार, एनएचएआई अधिकारी, राजस्व विभाग की टीम, कानोता, बस्सी और तूंगा थाना पुलिस, पुलिस लाइन का अतिरिक्त जाप्ता, संबंधित थानाधिकारी और बस्सी एसीपी मौजूद रहे। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। कार्रवाई के दौरान कुछ देर यातायात प्रभावित हुआ, जिसे पुलिस ने नियंत्रित कर सुचारू कर दिया। पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण रही।
अभियान के दौरान सड़क सीमा में आ रहे एक मंदिर को फिलहाल नहीं हटाया गया। अधिकारियों ने मंदिर के पुजारी को जल्द ही इसे अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थापित करने के निर्देश दिए। वहीं सड़क सीमा में आ रहे एक निजी अस्पताल के संबंध में न्यायालय से स्थगन आदेश होने के कारण संबंधित हिस्से को यथास्थिति छोड़ दिया गया।
कार्रवाई के दौरान कई परिवार भावुक नजर आए। वर्षों से छोटी दुकानों के सहारे परिवार का पालन-पोषण करने वाले व्यापारियों की आंखों के सामने जब जेसीबी ने टिनशेड, चबूतरे और दुकानों के आगे बने हिस्से हटाए तो कई लोगों की आंखें भर आईं। इस दौरान भीड़ में दो बेटियां अपने पिता से बार-बार पूछती रहीं कि अब घर कैसे चलेगा। पिता ने भावुक होते हुए भी उन्हें ढांढस बंधाया कि मेहनत के दम पर फिर से कारोबार खड़ा करेंगे। यह दृश्य देखकर आसपास मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
अधिकांश व्यापारियों ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध नहीं किया। पूर्व में नोटिस मिलने के कारण उन्होंने स्वयं सामान हटाकर सहयोग किया। हालांकि वर्षों की मेहनत से तैयार कारोबार का एक हिस्सा टूटता देख व्यापारियों का दर्द साफ दिखाई दिया। कई व्यापारियों ने कहा कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन आजीविका प्रभावित होने से भविष्य को लेकर चिंता जरूर है।