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GST Raid: जीएसटी विभाग की बड़ी कार्रवाई, जयपुर से कोटा तक सात प्रतिष्ठानों में मिली कर अनियमितताएं

GST Survey: जीएसटी विभाग की बड़ी कार्रवाई: राजस्थान में 7 प्रतिष्ठानों पर सर्वे, 159.95 लाख की संभावित कर देनदारी। बिना बिल कारोबार से फर्जी बिलिंग तक पर शिकंजा, जीएसटी विभाग ने 70.59 लाख रुपए जमा कराए।
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जयपुर

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Rajesh Dixit

Sep 20, 2026

GST

Photo AI

GST Department: जयपुर. राजस्थान वाणिज्यिक कर विभाग ने जीएसटी राजस्व में अनियमितताओं और कर अपवंचना के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत 18 सितंबर को प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर बड़ी कार्रवाई की। विभागीय अधिकारियों ने सात व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वे और निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में इन मामलों में करीब 159.95 लाख रुपए की संभावित कर देनदारी सामने आई है। कार्रवाई के दौरान संबंधित करदाताओं ने 70.59 लाख रुपए की राशि स्वैच्छिक रूप से जमा कराई।
विभाग के अनुसार कार्रवाई के दौरान अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट, बिना बिल खरीद-बिक्री, फर्जी बिलिंग, स्टॉक में अनियमितता और वास्तविक माल की आपूर्ति के बिना कर चालान जारी करने जैसे मामलों की जांच की गई। कई प्रतिष्ठानों से महत्वपूर्ण दस्तावेज, रजिस्टर, नोटबुक और अन्य अभिलेख भी जब्त किए गए हैं। इन सभी मामलों में विस्तृत जांच अभी जारी है।

जयपुर में प्रथम मोबिटल प्राइवेट लिमिटेड के यहां अवरुद्ध इनपुट टैक्स क्रेडिट के समायोजन से संबंधित जांच की गई। यहां करीब 21.60 लाख रुपए की संभावित कर देनदारी सामने आई। इसके विरुद्ध 4.74 लाख रुपए जमा कराए गए हैं। इनमें एक लाख रुपए इनपुट टैक्स क्रेडिट और 3.74 लाख रुपए नकद शामिल हैं।

अजमेर स्थित अरश फैशन कॉचर एलएलपी के यहां कपड़ा कारोबार में स्टॉक और कारोबार से जुड़े अभिलेखों की जांच की गई। भौतिक सत्यापन के दौरान घोषित स्टॉक से अधिक स्टॉक पाया गया। इस मामले में करीब 15 लाख रुपए की संभावित देनदारी के विरुद्ध 10.90 लाख रुपए स्वैच्छिक रूप से जमा कराए गए।

डीडवाना-कुचामन के बोरावड़ स्थित विनोद कुमार अग्रवाल के प्रतिष्ठान पर खाद्य तेल, चीनी, गुड़, चावल, पोहा और मसालों के कारोबार की जांच हुई। बिना उचित बिल के खरीद-बिक्री सहित अन्य तथ्यों की जांच के दौरान करीब 7 से 8 लाख रुपए की संभावित देनदारी सामने आई और 6.50 लाख रुपए नकद जमा कराए गए।

केकड़ी स्थित विजय मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्रीज में आयरन गुड्स, वेल्ड मेश, बार्ब्ड वायर और बेड निर्माण से जुड़े कारोबार की जांच की गई। कम नकद अनुपात और कारोबार छिपाने की आशंका के बीच दस्तावेजों और भौतिक स्टॉक को रिकॉर्ड में लिया गया। मामले में 15 लाख रुपए स्वैच्छिक रूप से जमा कराए गए।

किशनगढ़ के रांका टाइल्स में रद्द जीएसटी पंजीयन वाले आपूर्तिकर्ताओं से खरीद और उससे जुड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट की जांच में करीब 15.85 लाख रुपए की संभावित देनदारी सामने आई। इसके विरुद्ध 8.45 लाख रुपए नकद जमा कराए गए।

हनुमानगढ़ के जीत ट्रेलर्स में ट्रेलर निर्माण इकाई की खरीद और इनपुट टैक्स क्रेडिट से संबंधित अनियमितताओं की जांच की गई। पिछले तीन वर्षों में इनपुट टैक्स क्रेडिट के पूर्ण उपयोग की भी जांच हो रही है। यहां 25 लाख रुपए जमा कराए गए।

कोटा के गुलाब ट्रेडर्स के यहां वास्तविक माल की आपूर्ति के बिना कर चालान जारी किए जाने का मामला सामने आया। यहां करीब 40 लाख रुपए की संभावित कर देनदारी का आकलन किया गया है। इस मामले में अभी कोई स्वैच्छिक राशि जमा नहीं हुई है।

विभाग ने बताया कि सभी मामलों में पुस्तकों, खरीद-बिक्री अभिलेखों, स्टॉक और इनपुट टैक्स क्रेडिट की विस्तृत जांच जारी है। वास्तविक कर देनदारी निर्धारित होने के बाद संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।