
-मुकेश शर्मा
जयपुर: उदयपुर जिले के मांडवा क्षेत्र में हाल ही में पकड़ी गई करीब 57 हेक्टेयर में फैली गांजे की अवैध खेती का अनुमानित मूल्य 200 करोड़ रुपए आंका गया है। खेतों में पौधे तीन-चार फीट ऊंचे होने के बावजूद स्थानीय पुलिस और प्रशासन को इसकी भनक नहीं लगी। अब जांच में सबसे बड़ी चुनौती खेती करने वालों की पहचान करना है। गांजे की खेती 56 खसरों में मिली है, जिनके 400 से अधिक मालिक बताए जा रहे हैं। कई खसरों में 10-10 खातेदार हैं। इनमें भाई-बहन भी शामिल हैं, जबकि कुछ खातेदार दूसरे स्थानों पर रहते हैं। ऐसे में जमीन के मालिकों की सूची के आधार पर वास्तविक खेती करने वालों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने मामला दर्ज करने के बाद पटवारी, ग्राम सेवक, थानाधिकारी और उपाधीक्षक से संबंधित जमीनों और गांजे की खेती करने वालों की जानकारी मांगी है। उनसे खेती करने वालों की पहचान कर सूची उपलब्ध कराने को कहा गया है।
गांजे की खेती तैयार होने में कई महीने लगते हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी खेती का पता नहीं चलना स्थानीय सूचना तंत्र और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बुवाई से लेकर पौधों के तीन-चार फीट ऊंचे होने तक जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं मिली।
राजस्थान के कई जिलों में जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और खेतों में गांजे की खेती पकड़ी जा चुकी है। हालांकि, कई मामलों में खेती करने वालों और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचना चुनौती बना रहा। इस वर्ष जनवरी से सितंबर तक राजस्थान पुलिस 10,213 किलोग्राम गांजा बरामद कर चुकी थी।
उदयपुर: कोटड़ा के नयावास गांव में 7-8 अक्टूबर को 9.4 बीघा जमीन पर गांजे के 7,577 पौधे मिले। इनसे 2,273 किलोग्राम गांजा तैयार होने का अनुमान था, जिसकी कीमत 11.76 करोड़ रुपए आंकी गई।
जयपुर ग्रामीण: समोद क्षेत्र के विजय सिंहपुरा-बांसा गांव में 29 मार्च को बगीचे में उगाए गए गांजे के 1,510 पौधे जब्त किए गए। इस मामले में एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया।
डूंगरपुर: पांथल गांव में 18 सितंबर को कपास की फसल के बीच उगाए गए गांजे के 2,505 पौधे जब्त किए गए।
उदयपुर में जिन खसरों में गांजे की खेती मिली है, उनमें कई-कई मालिक हैं। कुछ खसरों में 10-10 खातेदार हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन से खेती करने वालों की पहचान कर उनके नाम मांगे गए हैं, ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
-घनश्याम सोनी, जोनल निदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, जोधपुर