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जयपुर ।
खगोलीय घटनाएं अपने आप में अनुपम होती हैं और यदि ये बिना दूरबीन के नजर आएं तो आमजन में इसकी झलक पाने की लालसा बढ़ जाती है। 27 जुलाई यानि आज की रात होने वाला चंद्रग्रहण अद्वितीय होगा। इसकी पूर्णता अवधि लगभग 104 मिनट है। आज रात होने वाला चंद्रग्रहण इस सदी का सबसे लंबी अवधि का चंद्रग्रहण कहा जा रहा है। इसे लेकर उत्साह और रोमांच तो है ही आशंकाएं भी कम नहीं।
हालांकि खगोल वैज्ञानिक ग्रहण से जुड़ी भय और आशंकाओं को सिरे से खारिज कर आधुनिक वैज्ञानिक विचारधारा अपनाने पर जोर देते हैं। इसी संदर्भ को लेकर पत्रिका ने भारतीय ताराभौतिकी संस्थान के प्रोफेसर रमेश कपूर और नेहरू तारामंडल मुंबई के पूर्व निदेशक पीयूष पाण्डेय से विशेष चर्चा की। दोनों विशेषज्ञों ने आमजन के लिए संदेश दिया है कि भय और आशंकाएं त्याग दीजिए और यह विलक्षण चन्द्रग्रहण जरूर देखिए।
प्रो. कपूर मुताबिक यह संयोग है कि ग्रहण तभी होते हैं जब ज्वार-भाटा अपने चरम पर होता है। क्योंकि ग्रहण या तो अमावस्या या पूर्णिमा के दिन होते है। इसलिए यह कहना ठीक नहीं कि ग्रहणों के कारण ज्वार-भाटा होता है। तो वहीं पीयूष पांण्डेय के अनुसार जब चंद्रमा पृथ्वी के छायावृत के मध्य से गुजरता है तब पूर्ण चंद्रग्रहण की अवधि अधिकतम1 घंटा 47 मिनट होती है। इस बार लगभग वही स्थिति है। इससे पहले 16 जुलाई 2000 को ऐसा ग्रहण हुआ था, जिसकी अवधि महत्तम थी।
आपको बता दें कि पूर्ण चंद्रग्रहण के समय चंद्रमा का रंग तांबई होता है। अगर आसमान पूरी तरह साफ रहा तो चंद्रमा का गोला हल्का नारंगी रंग लिए एक समान लाल रंग में नजर आएगा। हां! अगर कहीं ज्वालामुखी फटा हो तो उसकी धूल के कारण रंग थोड़ा धूमिल हो सकता है। क्योंकि, ज्वालामुखी की धूल आसमान में काफी ऊपर तक पहुंचती है। अगर आप खगोलीय घटनाओं में दिलचस्पी रखते हैं तो यह आपको रोमांचित करने देने वाली घटना होगी।
ये है महामंत्र
चंद्र ग्रहण के समय जहां कई काम वर्जित बताए गए हैं वहीं इस दौरान हर भजन करना और निम्न मंत्र का जाप करना बेहद शुभफल दायक बताया गया है -
ऊं क्षीरपुत्राय विद्महे, अमृत तत्वाय धीमहि तन्नो चंद्र: प्रचोदयात्।।