जयपुर

बच्चों को दें डिजिटल सुरक्षा की सीख, सिखाएं अनजान लिंक पर क्लिक न करें, निजी जानकारी को सुरक्षित रखें

Child Online Safety: भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के आधिकारिक हैंडल साइबर दोस्त ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। पोस्ट में कहा गया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की शुरुआत घर से होती है। माता-पिता और अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को सिखाएं कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखें।
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Oct 21, 2026
AI-generated-image-of-Family-Online-Safety-Celebration
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देशभर में इन दिनों साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में बच्चों की चिंता सबसे अधिक है, क्योंकि साइबर अपराधी सबसे पहले बच्चों को ही शिकार बनाते हैं। हाल ही भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के आधिकारिक हैंडल साइबर दोस्त ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश जारी किया है। पोस्ट में कहा गया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा की शुरुआत घर से होती है। माता-पिता और अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों को सिखाएं कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, अपनी निजी जानकारी को सुरक्षित रखें और ऑनलाइन कुछ भी असहज या संदिग्ध लगे तो तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क से बात करें।

यह संदेश त्योहार के माहौल में विशेष रूप से प्रासंगिक है। बच्चे ज्यादा समय ऑनलाइन बिताते हैं। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा की सीख देना सबसे बड़ा आशीर्वाद साबित हो सकता है। इस सीजन में ऑफर्स की भी बाढ़ लगी हुई है, ऐसे में सस्ते के चक्कर में लोग अपनी जमा पूंजी साइबर ठगों से कैसे बचाएं? बच्चों को सुरक्षित कैसे रखें? ये सभी जानकारी दी गई है।

घर से शुरू होती है ऑनलाइन सुरक्षा की नींव

बच्चों की साइबर सुरक्षा सबसे पहले माता-पिता की जागरूकता से जुड़ी होती है। घर में खुली बातचीत का माहौल बनाएं। बच्चों से पूछें कि वे कौन-सी ऐप्स इस्तेमाल करते हैं, किन लोगों से बात करते हैं और कौन-सी वेबसाइट्स देखते हैं। नियमित रूप से उनके डिजिटल व्यवहार पर नजर रखें, लेकिन बिना डर पैदा किए। साइबर दोस्त का संदेश साफ है-सुरक्षा की शुरुआत परिवार से होती है। अगर घर में सही आदतें डाली जाएं तो बच्चे बाहर की दुनिया में भी सतर्क रहेंगे।

अनजान लिंक और मैसेज से हमेशा सतर्क रहें

अनजान लिंक पर क्लिक करना बच्चों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हैकर्स आकर्षक ऑफर, गेम या वीडियो के नाम पर लिंक भेजते हैं। एक क्लिक से मोबाइल या कंप्यूटर में मैलवेयर आ सकता है, व्यक्तिगत डेटा चोरी हो सकता है या फिर अश्लील सामग्री सामने आ सकती है। बच्चों को सिखाएं कि किसी भी अजनबी मैसेज, ईमेल या सोशल मीडिया पोस्ट के लिंक पर तुरंत क्लिक न करें। अगर कोई लिंक जरूरी लगे तो पहले अभिभावक को दिखाएं। यह छोटी सी आदत बड़े नुकसान से बचा सकती है।

निजी जानकारी को हमेशा सुरक्षित रखें

नाम, पता, स्कूल का नाम, फोन नंबर, फोटो या घर का लोकेशन जैसी निजी जानकारी कभी भी ऑनलाइन साझा न करें। कई ऐप्स और गेम्स बच्चों से यह जानकारी मांगते हैं। साइबरदोस्त सलाह देता है कि निजी जानकारी को प्राइवेट रखें। सोशल मीडिया अकाउंट प्राइवेट रखें और अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें। बच्चों को समझाएं कि असली दोस्त ऑफलाइन होते हैं, ऑनलाइन अजनबी पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

कुछ गलत लगे तो तुरंत बताएं, हिचकिचाएं नहीं

ऑनलाइन कुछ भी असहज, डरावना या गलत लगे तो बच्चे को तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क—माता-पिता, शिक्षक या अभिभावक—से बात करनी चाहिए। साइबरबुलिंग, अश्लील संदेश या कोई संदिग्ध व्यक्ति संपर्क करे तो चुप न रहें। डर या शर्म की वजह से बात छिपाने से समस्या बढ़ सकती है। घर में ऐसा माहौल बनाएं जहां बच्चा बिना हिचकिचाहट के सब कुछ बता सके।

साइबर दोस्त का यह संदेश सिर्फ एक पोस्ट नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए जागरूकता का आह्वान है। सुरक्षित बचपन ही सुरक्षित डिजिटल भविष्य की नींव है। इस नवमी माता-पिता अपने बच्चों को सिर्फ आशीर्वाद ही न दें, बल्कि डिजिटल सुरक्षा की सीख भी दें। जागरूक बनें, सुरक्षित रहें। अधिक जानकारी या शिकायत के लिए 1930 नंबर पर कॉल करें।

Updated on:
21 Oct 2026 01:39 pm
Published on:
21 Oct 2026 01:39 pm