mid-day meal scheme : राजस्थान में सरकारी स्कूलों में संचालित मिड-डे-मील योजना में अब आमजन की भागीदारी भी जोड़ी गई है। अब घर में खास दिनों को यादगार बनाने और खुशी बांटने के लिए स्कूलों में स्वेच्छा से मिड-डे-मील के तहत भोज का आयोजन किया जा सकता है।
mid-day meal scheme : राजस्थान में सरकारी स्कूलों में संचालित मिड-डे-मील योजना में अब आमजन की भागीदारी भी जोड़ी गई है। अब घर में सामाजिक कार्यक्रम होने, वैवाहिक वर्षगांठ, जन्म दिन, बच्चों को नौकरी मिलने, धार्मिक यात्रा कर लौटने, त्यौहारों के साथ ही जीवन के अन्य खास दिनों को यादगार बनाने और खुशी बांटने के लिए स्कूलों में स्वेच्छा से मिड-डे-मील के तहत भोज का आयोजन किया जा सकता है।
इस योजना को श्रीकृष्ण भोग नाम दिया गया है। योजना के तहत स्कूलों में प्राथमिक कक्षाओं से लेकर आठवीं तक के बच्चों के साथ खुशी बांटी जा सकती है। श्रीकृष्ण भोग योजना के तहत मिलने वाली सहायता की मासिक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। एक रजिस्टर में इन्द्राज किया जाएगा। यह रिपोर्ट आयुक्त मिड-डे-मील को भेजनी होगी। इस योजना में सरकार और केन्द्र की ओर से कोई ग्रांट नहीं दी जाएगी।
-मिड-डे-मील के नियमित परोसे जाने वाले भोजन के साथ अतिरिक्त पौष्टिक खाद्य सामग्री (फल, शहद, मिष्ठान, दूध, दही, गुड़, मूंगफली चिक्की आदि) वितरित किए जा सकते हैं।
- स्कूलों में किसी भी प्रकार की अन्य खाद्य सामग्री (जिसका उपयोग शिक्षा विभाग की व्यवस्था के अनुसार भोजन पकाने में किया जा सकता है, जैसे घी, तेल, दाल, मसाले, शक्कर आदि) इस योजना के तहत दी जा सकती है।
-समाज या आमजन की ओर से दी जाने वाली सामग्री का उपयोग मिड-डे-मील योजना के तहत अतिरिक्त भोजन खिलाने के लिए किया जा सकता है। यदि राशि प्राप्त होती है तो उसका उपयोग रसोईघर निर्माण, बर्तन आदि खरीदने में भी किया जा सकता है।
-दानदाता व संस्था के साथ किसी व्यक्ति की ओर से खाद्य सामग्री के साथ बर्तन, गैस चूल्हे, दरी पट्टी, फर्नीचर आदि भी उपलब्ध करवाए जा सकते हैं।
-राशि नकद देने के साथ चेक, डिमाण्ड ड्राफ्ट देने के साथ स्कूल के बैंक खाते में जमा करवाई जा सकती है। उसका उपयोग देने वाले की इच्छा के अनुसार निर्माण कार्य या मिड-डे-मील में किया जाएगा।