
आषाढ़ बीता, सावन शुरू... किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार
दौसा. मानसून सीजन का आषाढ़ माह बीतने और सावन शुरू होने के बावजूद जिले में बारिश की कमी का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर दिखाई दे रहा है। जिले में अब तक औसत बारिश का करीब 29 फीसदी पानी ही बरसा है। कम बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई, जिससे ग्वार और बाजरे जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई लक्ष्य से पीछे रह गई है। किसान अब सावन में अच्छी बारिश होने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। जो फसल बोई थी वह भी कई जगह सूखने लगी है।
दौसा जिले में औसत वार्षिक मानसूनी बारिश 664.92 एमएम है, जबकि 1 अगस्त को सुबह आठ बजे तक 193.20 एमएम बारिश दर्ज की गई है। शुरुआती मानसून कमजोर रहने से कई क्षेत्रों में किसान समय पर बुवाई नहीं कर पाए।
खरीफ फसलों की स्थिति
फसल| लक्ष्य बुवाई (हेक्टेयर)
बाजरा 135000 122750
ज्वार 3000 2850
मक्का 00 40
मूंगफली 14000 12750
तिल 7000 5660
ग्वार 4000 2710
अन्य 5000 3530
देर से बुवाई से उत्पादन पर असर की आशंका
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ फसलों के लिए समय पर बुवाई जरूरी होती है। देरी से बुवाई होने पर फसल अवधि कम हो जाती है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कम बारिश की स्थिति में अंकुरण प्रभावित होने और किसानों की लागत बढ़ने की भी आशंका है।
जिले के वर्षा केंद्रों के अनुसार अब तक सबसे अधिक बारिश बसवा क्षेत्र में दर्ज की गई है। इसके बाद महवा और सिकराय क्षेत्र में भी अच्छी बारिश रिकॉर्ड की गई है।
यहां सबसे ज्यादा बरसात
बसवा 345
सिकराय310
महवा 280
बांदीकुई 262
रामगढ़ पचवारा 256
दौसा 229
यहां सबसे कम
लवाण 45
लालसोट 130
सैंथल सागर 128
कुण्डल 137
(एमएम में) |
अब सावन से उम्मीद
आषाढ़ में उम्मीद के अनुसार बारिश नहीं होने से बुवाई प्रभावित हुई है। अब सावन की बारिश ही खरीफ सीजन की दिशा तय करेगी। जिलेभर के किसान परेशान हैं।
रामस्वरूप मीणा, बनेपुरा
सूखने लगी फसल
खेत में बाजरे की फसल बोई थी। पहले सफेद लट लग गई, अब बरसात की कमी से फसल सूखने लगी है।
शिवजी मीना, किसान घूमना