विभागीय प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी होने के बाद वाहन मालिकों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाएगा। यदि वाहन मालिक द्वारा दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, भारी व्यावसायिक वाहनों पर इस कार्रवाई के बाद अगले चरण में निजी व अन्य नॉन-ट्रांसपोर्ट (गैर-व्यावसायिक) वाहनों को भी इस व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा।