हालांकि, 12 अगस्त 2015 को मृतकों के परिजनों ने कलेक्ट्रेट परिसर में शव रखकर हंगामा किया और पीड़िता के भाई को हत्या का मुख्य आरोपी बनवा दिया। इसी दौरान गांव के मुखिया और पंचों ने पीड़िता के भाई, पिता और मामा को दोषी मानते हुए उनका हुक्का-पानी बंद कर दिया। घटना के तीन महीने बाद 17 गांवों की महापंचायत बुलाई गई, जहां इस सामाजिक पाबंदी पर पक्की मुहर लगा दी गई।