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डूंगरपुर: मां-बाप चले गए, शादी नहीं की; सांवलिया सेठ को ही माना सबकुछ, जानें कौन हैं अमरजी पाटीदार?

Sanwaliya Seth: डूंगरपुर के अमरजी पाटीदार ने करीब 3 करोड़ रुपये की जमीन और मकान भगवान सांवलिया सेठ के नाम कर दिए। माता-पिता की सेवा में जीवन बिताने वाले अमरजी की अनोखी आस्थाअब चर्चा का विषय बनी हुई है।
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Amarji Patidar

मंदिर ट्रस्ट द्वारा दानवीर अमरजी का स्वागत करते ट्रस्ट मंडल पदाधिकारी (पत्रिका फोटो)

Amarji Patidar: राजस्थान के डूंगरपुर जिले के खेड़ासामौर गांव के रहने वाले श्रद्धालु अमरजी पुत्र गौतम पाटीदार ने अपनी अटूट आस्था की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। माता-पिता के निधन के बाद अकेले रह रहे अमरजी ने अपनी करोड़ों रुपये की संपत्ति भगवान श्री सांवलिया सेठ के नाम समर्पित कर दी है। उन्होंने करीब 1.50 करोड़ रुपये मूल्य की 10.15 बीघा कृषि भूमि भगवान के नाम रजिस्ट्री कर दी है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने करीब डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य के मकान की रजिस्ट्री के लिए आवश्यक स्टांप भी मंदिर प्रशासन को सौंप दिए हैं। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद मकान भी भगवान के नाम हो जाएगा।

23 जुलाई को भगवान के नाम कर दी करोड़ों की जमीन

शनिवार को अमरजी पाटीदार सांवलिया सेठ मंदिर पहुंचे और मंदिर प्रशासन को दान से जुड़े सभी दस्तावेज सौंपे। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई को विधिवत रजिस्ट्री कराकर कृषि भूमि भगवान के नाम कर दी गई। इस जमीन पर लगे आम के पेड़ सहित पूरी संपत्ति अब मंदिर की हो चुकी है। उन्होंने इच्छा जताई कि भविष्य में इस भूमि का उपयोग गौशाला निर्माण या अन्य समाजहित के कार्यों के लिए किया जाए।

बचपन की आस्था, पिता के सोने के आभूषण भी कर चुके हैं दान

अमरजी पाटीदार ने बताया कि बचपन से ही उनकी भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम के प्रति गहरी आस्था रही है। इसी विश्वास के कारण उन्होंने तय किया कि उनकी पूरी संपत्ति भगवान की होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में भी अपने पिता के कानों की सोने की मूर्तियां भगवान सांवलिया सेठ को अर्पित की थीं। अब उनकी इच्छा है कि अपनी मां के करीब एक किलो चांदी के आभूषण भी भगवान को समर्पित करें।

माता-पिता की सेवा के लिए नहीं की शादी

उन्होंने बताया कि वर्ष 2012 में पिता और 2023 में माता के निधन के बाद वे परिवार में अकेले रह गए। माता-पिता की सेवा को ही उन्होंने अपना सबसे बड़ा धर्म माना और इसी कारण जीवनभर विवाह भी नहीं किया। उनका कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा ने उन्हें अपनी पूरी संपत्ति भगवान को समर्पित करने का संकल्प दिया।

समाजहित में हो संपत्ति का उपयोग, यही है अंतिम इच्छा

अमरजी पाटीदार का कहना है कि उनकी इच्छा है कि भगवान को समर्पित की गई जमीन पर भविष्य में गौशाला बने या फिर ऐसे कार्य किए जाएं, जिनसे समाज का भला हो। उनकी इस अनूठी भक्ति, त्याग और समर्पण की भावना की अब पूरे इलाके में सराहना की जा रही है।

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