
Beneshwar Dham : सोम, माही और जाखम नदियों में बढ़ा जलस्तर। फोटो पत्रिका
Dungarpur Heavy Rain : मानसून की पहली तेज बारिश के बाद गुरुवार सुबह वागड़ प्रयागराज के नाम से प्रसिद्ध बेणेश्वरधाम चारों ओर से पानी से घिरकर टापू में तब्दील हो गया। धाम पर सुबह करीब 7 बजे सोम, माही और जाखम नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ने से धाम का संपर्क तीनों तटों से पूरी तरह टूट गया और आवाजाही बंद हो गई। स्थिति यह है कि साबला-बेणेश्वर पुल पर करीब 4 फीट, बेणेश्वर–वालाई पुल पर लगभग 7 फीट तथा बेणेश्वर–गनोड़ा पुल पर करीब 5 फीट ऊंची पानी की चादर बह रही है। तीनों पुल जलमग्न होने से किसी भी प्रकार की आवाजाही संभव नहीं रही।
बेणेश्वरधाम पर फिलहाल मंदिर के पुजारी, दुकानदार, व्यापारी तथा करीब 60 से 70 श्रद्धालु मौजूद हैं। संपर्क मार्ग बंद होने के कारण श्रद्धालु मंदिर परिसर के बाहर ही पूजा-अर्चना कर रहे हैं। वहीं, उफनती त्रिवेणी के दर्शन के लिए आस-पास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग नदी किनारों पर पहुंच रहे हैं।
सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बेणेश्वरधाम जाने वाले सभी मार्गों पर बैरिकेडिंग कर दी है तथा धाम के टापू में तब्दील होने संबंधी चेतावनी बोर्ड भी लगा दिए हैं। मौके पर पुलिस के जवान तैनात हैं और लोगों को पुल पार नहीं करने तथा प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की लगातार समझाइश दी जा रही है। प्रशासन जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए है।
इधर, बरसात में आवागमन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए 132.35 करोड़ रुपए की लागत से स्वीकृत हाई लेवल ब्रिज चार साल बाद भी अधूरा है। 2022 में शुरू हुए इस पुल का करीब 80 फीसदी काम पूरा हुआ है। पीडब्ल्यूडी का दावा है कि पुल अगले मानसून तक तैयार हो जाएगा।
डूंगरपुर के सागवाड़ा में लंबे इंतजार के बाद बुधवार दोपहर में मूसलाधार बारिश हुई। दोपहर में आसमान में काले बादल छाने के बाद तेज बारिश शुरू हुई। तहसील कंट्रोल रुम के अनुसार शाम को 44 मिमी बारिश दर्ज की गई है। तेज बारिश के कारण शहर का यातायात कुछ समय के लिए थम गया। गोल चौराहा सहित शहर की कई सड़कों पर जलभराव की स्थिति हो गई। सड़कों पर पानी बहने से पैदल चलने वाले लोगों को परेशानी हुई। बारिश के बाद मौसम में ठंडक घुल गई और मौसम सुहावना हो गया। शहर की गलियों में घुटने तक पानी भर गया है। किनारे खड़ी मोटर साइकिल के आधे टायर पानी में डूब गए।
जिले में बारिश का दौर शुरू होते ही किसानों के मायूस चेहरों से चिंता की लकीरें मिटने लगी हैं। बारिश होते ही किसान एक बार फिर नई उम्मीद के साथ खेतों का रुख कर रहे हैं। मानसून से खेतों में बोई गई खरीफ की फसलों को नवजीवन मिल गया है, जिससे किसानों की मेहनत बेकार जाने से बच गई।
Updated on:
23 Jul 2026 07:28 pm
Published on:
23 Jul 2026 03:47 pm
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