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राजस्थान: 6 वर्षीय मासूम की मौत, चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण थे; पूरे गांव में अलर्ट

राजस्थान के डूंगरपुर जिले की 6 वर्षीय बालिका की गुजरात के हिम्मतनगर में इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतका में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण बताए जा रहे हैं।
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डूंगरपुर

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Santosh Trivedi

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Updated: 18 Jul 2026, 6:21 PM IST

Rajasthan Dungarpur News

सीमलवाड़ा रतनपुरा में पहुंची चिकित्सा टीम एवं घर-घर सर्वे करती नर्सिंग महिलाएं. Photo- Patrika

राजस्थान के डूंगरपुर जिले के सीमलवाड़ा क्षेत्र के रतनपुरा गांव में एक छह वर्षीय मासूम बालिका की गुजरात के हिम्मतनगर में इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतका में चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण बताए जा रहे हैं। हालांकि, आधिकारिक मेडिकल रिपोर्ट आना अभी बाकी है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुष्टि नहीं की गई है। बीसीएमएचओ डॉ. नरेंद्र प्रजापति ने बताया कि रतनपुरा निवासी बालिका 13 जुलाई को गुजरात के सीमावर्ती गांव तम्बोलिया से अपने घर लौटी थी।

देर रात अचानक उल्टी होने के कारण उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजन उसे सीमलवाड़ा के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रैफर कर दिया गया। इसके बाद परिजन उसे गुजरात के मेघराज स्थित जलाराम अस्पताल ले गए, जहां से 14 जुलाई को उसे हिम्मतनगर के सरकारी अस्पताल भेजा गया। वहां इलाज के दौरान 15 जुलाई को बच्ची ने दम तोड़ दिया।

75 घरों का सर्वे, 40 लोगों के लिए सैंपल

मासूम की मौत की सूचना मिलते ही चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर आ गया। शुक्रवार को विभाग की टीम ने पूरे गांव में पायरेथ्रम स्प्रे से फॉगिंग कराई। इसके साथ ही टीम ने गांव के 75 घरों का सर्वे कर 353 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। राहत की बात यह रही कि सर्वे के दौरान गांव में किसी भी अन्य व्यक्ति में बुखार या चांदीपुरा वायरस के लक्षण नहीं मिले हैं। इसके बावजूद एहतियात के तौर पर मृतका के संपर्क में आए 40 लोगों के रक्त के सैंपल लेकर जिला अस्पताल भेजे गए हैं। मेडिकल टीम ग्रामीणों को आइसोलेशन और बीमारी से बचाव के प्रति जागरूक कर रही है।

चांदीपुरा वायरस के बारे में जानें

चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को प्रभावित करता है। इसकी पहली पहचान 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी। यह वायरस सैंडफ्लाई और कुछ मामलों में मच्छरों के जरिए फैलता है। इसमें तेज बुखार, उल्टी, दौरे और दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) जैसे लक्षण दिखते हैं।

गंभीर स्थिति में मरीज की हालत 24 से 48 घंटे में बिगड़ सकती है। फिलहाल इसकी कोई विशेष दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसलिए समय पर अस्पताल पहुंचना, मच्छरों और सैंडफ्लाई से बचाव करना तथा बच्चों में लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू कराना सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।