
जयपुर। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक सहित कई राज्यों में तबादलों के लिए स्पष्ट नीति लागू है, जबकि राजस्थान में वर्षों से विधायक या सत्ताधारी दल के नेताओं की 'डिजायर' (सिफारिश) के बिना तबादला मुश्किल है। तबादला सीजन शुरू होते ही विभागों में सक्रिय दलाल शुरू भी सक्रिय हो जाते हैं। इनमें कुछ प्रभाव का दावा करते हैं तो कुछ कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा उठाकर ठगी करते हैं। हालांकि इन पर निगरानी की कोई व्यवस्थित व्यवस्था नहीं है।
शिक्षा, पुलिस, कृषि, ग्रामीण विकास और नगरीय विकास जैसे कुछ महत्वपूर्ण विभागों में तबादले कराने की गारंटी देने वाले लोग सबसे अधिक सक्रिय रहते हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों की अलग से निगरानी का कोई सिस्टम नहीं है, लेकिन शिकायत मिलने पर कार्रवाई जरूर की जाएगी। हालांकि, बड़ा सवाल ये है कि आखिर राजस्थान में तबादला नीति कब लागू होगी?
इधर, हनुमानगढ़ के भादरा में भाजपा विधायक संजीव बेनीवाल ने गत दिनों एक कार्यक्रम में कहा कि दुर्भाग्य है कि अपने गांव या शहर से केवल 10-20 किलोमीटर दूर पदस्थापित कर्मचारी भी तबादले के आवेदन लेकर पहुंच रहे हैं। जबकि प्राथमिकता उन कर्मचारियों को मिलनी चाहिए जो परित्यक्ता, विधवा, दिव्यांग हैं या पति-पत्नी अलग-अलग स्थानों पर कार्यरत हैं।
आंध्र प्रदेशः कार्मिक का तीन साल से पहले तबादला नहीं और एक स्थान पर पांच वर्ष से अधिक पदस्थापन नहीं। प्रोवेशन काल में तबादले नहीं। महिला, दिव्यांग, सम्मानित शिक्षकों सहित 11 श्रेणियों को तबादलों में प्राथमिकता। इसके बाद रिक्त पदों के आधार पर तबादले।
कर्नाटकः कार्मिकों के लिए तीन से सात वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर ही तबादले का प्रावधान। गंभीर बीमारी, दिव्यांगता और पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में होने पर प्राथमिकता।
हरियाणाः नई तबादला नीति में 120 अंकों का सिस्टम बनाया है। कर्मचारी ऑनलाइन आवेदन करते हैं और निर्धारित मानकों के आधार पर प्राथमिकता तय होती है।
उत्तर प्रदेशः एक जिले में तीन वर्ष और एक संभाग में सात वर्ष से अधिक पदस्थापन नहीं। ऑनलाइन पोर्टल पर पसंदीदा जिलों का चयन किया जा सकता है। किसी भी कैडर में 20 प्रतिशत से अधिक तबादले नहीं किए जा सकते।
पंजाब: तबादलों के लिए ऑनलाइन विंडो। नीति परफॉर्मेंस, वार्षिक मूल्यांकन और अन्य मानकों के आधार पर 250 में 90 अंक जरूरी। सरकारी स्कूल में अपने बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को 15 अंक अतिरिक्त का प्रावधान।
दिल्ली: तीन से पांच वर्ष में तबादले का प्रावधान। हर वर्ष अगस्त में तबादले। आवेदन ऑनलाइन होते हैं और शिक्षकों के लिए निवास के नजदीक ही पदस्थापन में प्राथमिकता दी जाती है।
कई राज्यों की तबादला नीतियों का अध्ययन कर हमने तत्कालीन सरकार को प्रारूप सौंपा था, लेकिन उसे लागू नहीं किया गया। जनहित में राजस्थान में भी स्पष्ट तबादला नीति लागू की जानी चाहिए।
-ओंकार सिंह, पूर्व आइएएस (जिन्होंने अशोक गहलोत सरकार के समय तबादला नीति का ड्राफ्ट बनाया)