जयपुर

जयपुर में 2 लोग डिजिटिल अरेस्ट, साइबर ठगों ने हड़प लिए लाखों रुपए, वैशाली नगर और करणी विहार का मामला

जयपुर में साइबर ठगी के दो मामलों में बदमाशों ने 16 लाख रुपए हड़प लिए। वैशाली नगर में फर्जी डिजिटल दस्तावेज दिखाकर 6.56 लाख ठगे गए, जबकि करणी विहार में ऑनलाइन जॉब के नाम पर 9.43 लाख ट्रांसफर करवाए गए।
2 min read
• •
Updated: 1 Mar 2026, 9:31 AM IST
Digital Arrest Online Job Scams Swindle 16 Lakh in Jaipur Vaishali Nagar and Karni Vihar
डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन जॉब के नाम पर 16 लाख की चपत (पत्रिका क्रिएटिव फोटो)

Jaipur Cyber Fraud: जयपुर: राजस्थान की राजधानी में साइबर अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। ताजा मामलों में शहर के वैशाली नगर और करणी विहार थाना क्षेत्रों में जालसाजों ने दो व्यक्तियों को अपना निशाना बनाते हुए करीब 16 लाख रुपए की चपत लगा दी।

बता दें कि पुलिस ने दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज कर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है। वैशाली नगर निवासी मुकुल अग्रवाल के साथ हुई ठगी का तरीका बेहद शातिराना था। ठगों ने उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी तकनीक का उपयोग कर मनोवैज्ञानिक जाल में फंसाया।

जालसाजों ने मुकुल को फर्जी डिजिटल दस्तावेज दिखाए, जो देखने में बिल्कुल असली सरकारी नोटिस जैसे लग रहे थे। इन दस्तावेजों के जरिए मुकुल को डराया गया कि वे किसी गंभीर कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं।

डर के मारे मुकुल ने आरोपियों के कहे अनुसार अलग-अलग किश्तों में कुल 6,56,300 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। रकम मिलते ही ठगों ने अपना फोन और संपर्क के तमाम रास्ते बंद कर लिए।

पांच्यावाला में 'वर्क फ्रॉम होम' के नाम पर लूट

दूसरा मामला करणी विहार थाने का है, जहां पांच्यावाला के रहने वाले विधेश खन्ना को घर बैठे कमाई का लालच भारी पड़ गया। विधेश को सोशल मीडिया के जरिए ऑनलाइन जॉब और टास्क पूरे कर पैसे कमाने का ऑफर दिया गया। शुरुआत में ठगों ने उन्हें छोटे-छोटे टास्क दिए और बदले में कुछ पैसे वापस भी किए, ताकि विधेश का उन पर अटूट विश्वास बन जाए।

जैसे ही विश्वास बढ़ा, ठगों ने 'प्रीमियम टास्क' और 'सिक्योरिटी शुल्क' के नाम पर निवेश की मांग शुरू कर दी। विधेश ने बेहतर रिटर्न की उम्मीद में 9,43,728 रुपए गंवा दिए।

पुलिस की कार्रवाई और साइबर सुरक्षा की चेतावनी

दोनों ही मामलों में पीड़ितों ने सबसे पहले साइबर हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब उन बैंक खातों की डिटेल्स खंगाल रही है, जिनमें पैसा ट्रांसफर हुआ है। साथ ही, आरोपियों के मोबाइल नंबरों की लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए गिरोह तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

विशेषज्ञों की सलाह

  • कोई भी सरकारी एजेंसी फोन पर पैसे की मांग या 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती।
  • अनजान नंबरों से आने वाले 'टास्क बेस्ड जॉब' के ऑफर्स से बचें।
  • किसी भी अनजान खाते में बड़ी राशि भेजने से पहले संबंधित विभाग या पुलिस से पुष्टि जरूर करें।
Updated on:
1 Mar 2026, 9:31 AM IST
Published on: