जयपुर

गंदगी व बीमारियों ने दोगुना किया बच्चो में कुपोषण

गरीबी और भुखमरी के अलावा सामने आए कुपोषण के दूसरे कारण

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Mar 17, 2018

जयपुर . बच्चों में कुपोषण की समस्या से ग्रसित राजस्थान में इसका वास्तविक आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से करीब दोगुना है। सरकारी आंकड़े भुखमरी के कारण कुपोषण की समस्या को ही मुख्यतया दिखा रहे हैं। मगर वास्तविकता यह है कि इन आंकड़ों से अलग बीमारियों के गढ़ राजस्थान में साफ सफाई का अभाव और जन्मजात विकृतियों के कारण पूरी तरह पोषक आहार नहीं लेने वाले बच्चे भी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े बच्चों के जेके लोन अस्पताल सहित अन्य अस्पतालों में सामने आया कि यहां बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे भी पोषक आहार नहीं ले पा रहे हैं, जो किसी ना किसी जन्मजात या जन्म के बाद मिली विकृति के शिकार हैं। इनमें हृदय, किडनी, मुंह, पेट, शारीरिक बनावट में गड़बड़ या अन्य किसी भी तरह की गंभीर बीमारी से पीडि़त बच्चे अधिक हैं। कुपोषण के कारणों में भुखमरी के अलावा सामाजिक कारण, अज्ञानता,

इसलिए बीमरियों का गढ़

- 1,200 से अधिक स्वाइन फ्लू मरीजों और 100 से ज्यादा मौतों के साथ देश में अव्वल

- 7,50 से अधिक डेंगू का आंकडा पहुंच चुका है

ज्यादातर नहीं जानते कैसे रखें ख्याल

- बच्चे का किसी भी मेडिकल कारण से उचित खुराक नहीं ले पाना
- कई माता पिता को बच्चों के सही तरीके से पालन-पोषण की जानकारी ही नहीं होती समय पर कॉम्प्लीमेंट्री फीडिंग शुरू नहीं करती और स्तनपान ही कराती रहती हैं
- कई बच्चे दूध ढंग से नहीं पी पाते, जिसके कारण कुपोषित हो जाते हैं वर्ष 2017 डायरिया पीडि़त 51 हजार मरीज जेके लोन आए
- स्वच्छता की कमी के कारण संक्रमण बढ़ता है, न्यूट्रीशन लोस बढ़ जाता है
- बाल मजदूरी भी कुपोषण का बड़ा कारण

नहीं ले पाते पूरी खुराक

शिशु रोग विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी तरह की गंभीर बीमारी का शिकार होने पर बच्चे उचित आहार नहीं ले पाते और कुप्रोषण का शिकार हो जाते है। इन बीमारियों के उपचार का खर्चा और प्रक्रिया इतनी लंबी होती है कि निम्न और गरीब तबके के वर्गों के अलावा मध्यम वर्ग के लोग भी बच्चों का समय पर उपचार नहीं करा पाते। प्रदेश में तो शिशु रोग सर्जरी के सरकारी अस्पतालों में बेहतर इंतजाम भी नहीं है। साथ ही उन्हें तत्काल नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल जाए। निजी अस्पताल में महंगे उपचार के कारण देरी होती है।

कैसे रखें ख्याल

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक, नवीन जैन ने बताया की कुपोषित बच्चों के इलाज और निगरानी के लिए पूरा तंत्र है। समुदाय आधारित कुपोषण प्रबंधन कार्यक्रम के बेहतरीन परिणाम सामने आए हैं। जहां तक कुपोषण का सवाल है, यह अभी मौजूद तो है, लेकिन पहले से काफी नियंत्रण में आया है।

जेके लोन अस्पताल अधीक्षक, डॉ.अशोक गुप्ता ने कहा की गरीबी-भुखमरी के कारण कुपोषण अलग विषय है, लेकिन कुपोषण का कारण मेडिकली इलनेस, स्वच्छता का अभाव भी है। अस्पताल में ऐसे बच्चे भी आते हैं, जिनके माता पिता को ज्ञान ही नहीं है बच्चों के पालन-पोषण का।

हजारों बच्चे कुपोषण के शिकार

रेपिड सर्वे ऑन चिल्ड्रन (आरसोक) के अनुसार राजस्थान में 6 माह से 5 साल तक की आयु के बच्चों में से करीब 22 हजार बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। वहीं करीब 22 हजार बच्चे घातक कुपोषण के शिकार भी हैं। वहीं अन्य रिपोर्ट्स व भुखमरी के अलावा अन्य कारणों को भी जोड़ें तो राजस्थान में उदयपुर सहित कुछ जिलों में ही इनकी संख्या एक लाख से अधिक है।

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Published on:
17 Mar 2018 12:12 pm
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