Water Dispute: जल बंटवारे को लेकर पंजाब और राजस्थान के बीच विवाद तेज हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि कानूनी जांच के बाद ही आगे का रुख तय किया जाएगा।
जयपुर। जल बंटवारे को लेकर पंजाब और राजस्थान के बीच विवाद तेज हो गया है। पंजाब सरकार ने आधिकारिक पत्र भेजकर राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ रुपए की रॉयल्टी का दावा किया है। इसके लिए वर्ष 1920 के समझौते का हवाला देते हुए भुगतान की मांग की गई है। इस पर राजस्थान सरकार सतर्क हो गई है और मामले को विधिक राय के लिए दिल्ली भेज दिया है।
अधिकारियों का कहना है कि कानूनी जांच के बाद ही आगे का रुख तय किया जाएगा। गौरतलब है कि पंजाब के मुख्यमंत्री पहले ही इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठा चुके हैं, जिससे अंतरराज्यीय विवाद बढ़ने के आसार है।
1920 में तत्कालीन पंजाब सरकार, बहावलपुर नवाब (अब पाकिस्तान में) और बीकानेर महाराजा के बीच हुए समझौते में सतलुज का पानी बीकानेर (अब राजस्थान) को देने के बदले रॉयल्टी तय हुई थी, जिसकी दर 6.50 रु. प्रति एकड़ (प्रति वर्ष) थी। आजादी के बाद 1955 में जल बंटवारा तय हुआ। पंजाब का कहना है कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियां उसके क्षेत्र में बहती हैं और 1920 समझौते के तहत रॉयल्टी का अधिकार अब भी लागू है।
आजादी के बाद संबंधित राज्यों की जरूरत के अनुसार नदियों के पानी का बंटवारा हुआ, जिसमें राजस्थान को 8 एमएएफ सबसे बड़ा हिस्सा मिला।
पंजाब: 5.90 एमएएफ
कश्मीर: 0.65 एमएएफ
राजस्थान: 8.00 एमएएफ
पटियाला एवं ईस्ट पंजाब स्टेट यूनियन: 1.30 एमएएफ
कुल: 15.85 एमएएफ
1920 दरः 6.50 रुपए प्रति एकड
1960 तक 8% ब्याज सहितः 141.20 रुपए प्रति एकड़
वार्षिक आपूर्तिः 10 मिलियन एकड़ पफीट (रावी, ब्यास, सतलुज से)
प्रतिदिन डिस्चार्ज (बहाव): 13810 क्यूसेक (365 दिन का औसत)
पानी का अलाउंस: 25 क्यूसेक प्रति 1000 एकड़
सिंचित क्षेत्रः करीब 55.24 लाख एकड़
1961-2025 तक 8 प्रतिशत ब्याज के साथ कुल राशि: 1,44,083 करोड़ रुपए
पंजाब का रॉयल्टी का दावा उचित नहीं है। अंतरराज्यीय नदियों का जल राष्ट्रीय संसाधन है, जिस पर किसी एक राज्य का अधिकार नहीं हो सकता। राजस्थान अपने हितों की रक्षा करेगा और उचित कानूनी कदम उठाएगा।
-सुरेश सिंह, रावत, जल संसाधन मंत्री