
जयपुर . हाल ही में डॉक्टरों के फर्जी बिल पेश करने का मामला सामने आया जिसके तहत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की ट्रेनिंग में बिलों के फर्जीवाड़े को लेकर शुक्रवार को चिकित्सा विभाग ने 11 डॉक्टरों को तलब किया। इस कार्यवाही दौरान सभी डॉक्टर्स से अलग-अलग पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान डॉक्टरों की ओर से पेश किए गए बिल और बयानों में अंतर पाया गया।
डॉक्टर्स द्वारा पेश किए गए बिलों और बयानों में अन्तर से यह बात साफ़ हो गई हैं कि डॉक्टरों ने बिलों में फर्जीवाड़ा किया है। ऐसे में विभाग ने दोषी डॉक्टरों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर ली हैं। जिसकी रिपोर्ट तैयार कर आला अधिकारियों को भेजी जा रही है। पहले चरण में विभाग की तरफ से सैम्पल के तौर पर एक बैच के बिलों की जांच की गई थी। जांच के बाद अब डॉक्टरों के बयानों से भी फर्जीवाड़े की पुष्टि हो गई है। अब विभाग करीब 200 डॉक्टरों के बिलों की भी जांच-पड़ताल करेगा।
कम्प्यूटर से बनाए गए होटलों के फर्जी बिल
डॉक्टरों ने होटलों के फर्जी बिल पेश करने के लिए कई तरह के पैतरे आजमाए हैं। जांच में सामने आया है की जो डॉक्टर होटलों में नहीं रुके, उन्होंने भी कम्प्यूटर से फर्जी बिल तैयार कर पेश कर दिए। साथ ही उनके कई ने साथी डॉक्टरों से होटलों के बिल लेकर फॉटो कॉपी करा ली और उस पर अपनी जानकारी अंकित कर पेश कर दिए।
चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ शुक्रवार को एसएमएम अस्पताल पहुंचे उन्होंने कहा मामले कि जांच की जा रही हैं, साथ ही दोषी पाए जाने वाले डॉक्टर्स पर विभाग को सख्त से सख्त कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।
एलएन सोनी, एडिशनल मिशन निदेशक, एनएचएम ने बताया की डॉक्टरों को तलब कर पूछताछ की गई। उनके दस्तावेजों और बयानों में काफी अंतर मिला है। रिपेार्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जा रही है।