
जयपुर
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। शिक्षामंत्री ने जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर उनसे विभागीय अभियान में भागीदार बनने की अपील की है। विभाग चाहता है कि खुले में शौच मुक्त यानि ओडीएफ की तर्ज पर पंचायतों को ड्रॉप आउट फ्री यानि डीओएफ बनाया जाए। नामांकन बढ़ाने के लिए विभागीय प्रवेशोत्सव अभियान का पहला चरण गुरूवार से राज्यभर में शुरू होगा।
शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने जनप्रतिनिधियों को व्यक्तिशः पत्र लिखा है। शिक्षामंत्री से आह्वान किया है कि वे अपने अपने क्षेत्र के अभिभावकों को बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलवाने के लिए प्रेरित करें। ताकि विद्यार्थियों को आयु के हिसाब से कक्षा में दाखिला मिल सके। शिक्षामंत्री ने पंचायत समिति प्रधान, सरपंचों से शत प्रतिशत नामांकन और ठहराव में सक्रिय सहयोग की अपील की है।
डीओएफ घोषित होगी पंचायत
विभाग का मानना है कि नामांकन बढ़ाने और ड्रॉप आउट को रोकने के सामुहिक प्रयासों की जरूरत है। ताकि समाज में एक भी बच्चा स्कूल में दाखिले से वंचित नहीं रहे। उन्होंने कहा कि जिन पंचायतों में शत प्रतिशत बच्चों का नामाँकन होगा, उन्हें उजियारी पंचायत के रूप में सम्मानित किया जाएगा। ओडीएफ की तर्ज पर उन्हें ड्रॉपआउट फ्री घोषित किया जाएगा।
पत्र में शिक्षामंत्री की अपील
शिक्षा राज्य मंत्री ने जनप्रतिनिधियों को लिखे पत्र में कहा है कि प्रवेशोत्सव के दौरान नामांकन के लिए घर-घर सर्वे कर रहे शिक्षकों को सहयोग दें। कोशिश करें कि उनके क्षेत्र का एक भी बच्चा विद्यालय शिक्षा से वंचित नहीं रहे। शिक्षा अधिकार कानून के तहत 6 से 14 आयुवर्ग के हर बच्चे को स्कूल में दाखिला दिलवाना जरूरी है। 6 साल से कम आयु के बच्चों को नजदीकी आंगनबाड़ी में भेजा जाना चाहिए। आपकाे बता दें कि राइट टू एजुकेशन में इस आयुवर्ग के बच्चाें के लिए अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है।