
राजस्थान निकाय-पंचायत चुनाव को लेकर बीजेपी की बैठक (फोटो- पत्रिका नेटवर्क)
जयपुर। राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां तेज हो गई हैं। एक ओर राज्य निर्वाचन आयोग चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने भी चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। शनिवार को जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में 'नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनाव संचालन समिति' की अहम बैठक हुई, जिसमें संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और चुनावी प्रबंधन पर विस्तार से मंथन किया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, प्रदेश संगठन महामंत्री अजेय कुमार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों ने भाग लिया। इस दौरान आगामी पंचायत और निकाय चुनावों के लिए संगठनात्मक तैयारियों, बूथ प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारियों और चुनाव संचालन की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के बाद भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में है और संगठन बूथ स्तर तक सक्रिय है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की गई है तथा चुनाव संचालन की सभी व्यवस्थाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं।
राठौड़ ने कहा कि हाल के उपचुनावों में भाजपा ने 80 प्रतिशत से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के विधानसभा क्षेत्र में हुए पंचायत समिति उपचुनाव में भी भाजपा ने जीत हासिल की थी। उनके अनुसार, यही प्रदर्शन आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में भी दोहराया जाएगा।
मदन राठौड़ ने कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष भाजपा की उपलब्धियों पर चर्चा करने के बजाय आपसी खींचतान में उलझा हुआ है। उनके मुताबिक कांग्रेस के नेता एक-दूसरे को पीछे छोड़ने और शीर्ष नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने की होड़ में लगे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कामों की सराहना करना विपक्ष के लिए राजनीतिक रूप से मुश्किल है, इसलिए वे लगातार आलोचना का रास्ता अपनाते हैं।
इधर, राज्य निर्वाचन आयोग भी पंचायत और निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। आयोग ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सभी जिलों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि फर्जी मतदान रोकने के लिए मतदाताओं की पहचान का कड़ाई से सत्यापन किया जाएगा और मतदान के दौरान फोटोयुक्त पहचान पत्र या आयोग द्वारा मान्य वैकल्पिक दस्तावेज प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा ओबीसी आरक्षण प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनावी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की तैयारी भी चल रही है। माना जा रहा है कि आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होते ही पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों की औपचारिक घोषणा का रास्ता साफ हो जाएगा। ऐसे में राजनीतिक दलों के साथ-साथ निर्वाचन आयोग भी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गया है।
Updated on:
01 Aug 2026 06:41 pm
Published on:
01 Aug 2026 06:41 pm
