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राजस्थान कांग्रेस में क्या फिर शुरू हो गई अंदरूनी कलह? डोटासरा के बयान के बाद पार्टी से ही आया पलटवार

राजस्थान कांग्रेस में बयानबाजी ने एक बार फिर सियासी हलचल बढ़ा दी है। प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के 'ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे' वाले बयान के अगले ही दिन पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप चौधरी की सोशल मीडिया पोस्ट ने अंदरूनी खींचतान की चर्चाओं को हवा दे दी।
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जयपुर

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Kamal Mishra

Aug 01, 2026

Govind Singh Dotasara

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा। फाइल फोटो- पत्रिका

जयपुर। राजस्थान कांग्रेस में एक बार फिर बयानों की सियासत ने हलचल बढ़ा दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के हालिया बयान के बाद पार्टी के ही प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप चौधरी की सोशल मीडिया पोस्ट ने राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दे दी है। दोनों नेताओं ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन शब्दों के चयन और घटनाक्रम के समय ने कांग्रेस के भीतर नए सिरे से गुटबाजी की अटकलों को हवा दे दी है।

डोटासरा ने कहा- राहुल गांधी का भरोसा ही काफी

जयपुर में आयोजित कांग्रेस के एक कार्यक्रम में प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और उन्हें राहुल गांधी ने अच्छे काम के लिए सराहा है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि जब पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उनके काम से संतुष्ट है तो उन्हें किसी "ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे" से प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है।

डोटासरा का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक हलकों में इसकी अलग-अलग व्याख्या शुरू हो गई। कांग्रेस के भीतर भी इसे लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया।

अगले दिन संदीप चौधरी की पोस्ट बनी चर्चा का विषय

डोटासरा के बयान के करीब 24 घंटे बाद कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष संदीप चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक संक्षिप्त लेकिन तीखा संदेश लिखा। उन्होंने पोस्ट में लिखा, "ऐरे-गैरे नत्थू-खैरे कुछ बन जाते हैं, तो पागल हो जाते हैं।"

हालांकि उन्होंने किसी नेता का नाम नहीं लिखा, लेकिन कांग्रेस और राजनीतिक गलियारों में इसे डोटासरा के बयान की प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। यही वजह है कि पार्टी के भीतर चल रही संभावित खींचतान की चर्चा फिर तेज हो गई।

गहलोत खेमे के करीबी माने जाते हैं चौधरी

संदीप चौधरी को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के करीबी नेताओं में गिना जाता है। वे कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला के भी विश्वासपात्र माने जाते हैं। गहलोत सरकार के दौरान उन्हें बंजर भूमि विकास बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था और राज्यमंत्री का दर्जा भी मिला था।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ऐसे में उनकी सोशल मीडिया पोस्ट को सामान्य टिप्पणी नहीं माना जा सकता। इसे पार्टी के अंदर चल रहे शक्ति संतुलन से जोड़कर देखा जा रहा है।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के साथ बांसवाड़ा से आए कार्यकर्ताओं ने अशोक गहलोत के जयपुर स्थित आवास पर उन्हें चौथी बार मुख्यमंत्री बनाने के समर्थन में नारे लगाए।

इसके बाद यही कार्यकर्ता प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पहुंचे। वहां डोटासरा ने मंच से बिना किसी का नाम लिए कहा कि व्यक्तिगत ब्रांडिंग करने वालों को यह मुबारक हो, लेकिन व्यक्तिवाद ने कांग्रेस को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को अपनी पिछली गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना होगा।

गहलोत ने कहा- पार्टी में कोई विवाद नहीं

डोटासरा के बयान के बाद जब मीडिया ने अशोक गहलोत से संगठन में मतभेद को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने किसी भी तरह के विवाद से इनकार किया। गहलोत ने कहा कि प्रदेशाध्यक्ष के साथ उनके रिश्ते सामान्य हैं और कांग्रेस पूरी तरह एकजुट होकर काम कर रही है। हालांकि, गहलोत के इस बयान के कुछ ही घंटों बाद संदीप चौधरी की पोस्ट सामने आने से राजनीतिक चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ लिया।

बयानों ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी

कांग्रेस नेताओं ने भले ही एक-दूसरे का नाम लेने से परहेज किया हो, लेकिन लगातार आ रहे सार्वजनिक बयानों ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान की चर्चाओं को फिर जीवित कर दिया है। आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच कांग्रेस एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रही है, लेकिन नेताओं की बयानबाजी फिलहाल संगठन के भीतर मतभेदों की अटकलों को थमने नहीं दे रही है। दूसरी तरफ इन बयानों का बीजेपी भी फायदा उठा रही है, लगातार बीजेपी के बड़े नेता कांग्रेस में गुटबाजी का आरोप लगा रहे हैं।