
सीजेआई सूर्यकांत
देश के प्रधान न्यायाधीश चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया - सीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ अदालतों में बड़ी संख्या में खाली पदों को लेकर कहा कि इनको भरने के प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मध्यस्थता केवल वैकल्पिक विवाद निस्तारण का माध्यम नहीं है, बल्कि इसमें शांति की भावना होती है। कानूनी प्रावधान होने के कारण सरकार को भी इसे बढ़ावा देना ही होगा। सूर्यकांत कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस-2026 में भाग लेने जयपुर आए और दो दिवसीय प्रवास के बाद शनिवार को वापस लौट गए। इसी दौरान राजस्थान पत्रिका ने मध्यस्थता की स्थिति और न्याय में देरी का कारण बन रहे अदालतों में न्यायाधीशों के खाली पदों को लेकर उनसे बात की।
सवाल - मीडिएशन उपयोगी है, लेकिन अभी लोकप्रिय बन ही नही पाया है।
जवाब - मीडिएशन को लोकप्रिय बनाने के लिए जयपुर में जो कॉन्फ्रेंस हुई, वह अच्छी शुरूआत है। मीडिएशन का कल्चर विकसित हो रहा है, इसके लिए सेंटर बन रहे हैं। कानून बनने के कारण सरकार भी प्रयास करेगी। मीडिएशन एडीआर यानि विवाद निस्तारण का वैकल्पिक माध्यम नहीं है, इसमें दोनों पक्ष रिश्ते सही बनाए रखते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें शांति की भावना निहित होती है।
सवाल - हाईकोर्ट और अधीनस्थ न्यायालयों में बड़ी संख्या में खाली पद हैं, जिन्हें सरकार भर नहीं रही है?
जवाब - खाली पदों को भरने के प्रयास हो रहे हैं। सरकार इसके लिए कार्य कर रही है। यह ऐसा विषय नहीं है, जिसमें सरकार के साथ मध्यस्थता की ज़रूरत हो।
सवाल - कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मध्यस्थता और संवाद कितना ज़रूरी है?
जवाब - बहस या विवाद के बजाय संवाद किसी भी विवाद को सुलझाने का बेहतर तरीका है। यह कॉन्फ्रेंस एक महत्वाकांक्षी पहल है। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में मध्यस्थता की भूमिका के लिए यह एक सार्थक प्रयास है।
सवाल- क्या कॉन्फ्रेंस में तैयार होने वाला जयपुर डिक्लेरेशन कॉमनवेल्थ देशों के अलावा वैश्विक स्तर पर भी प्रभावी होगा?
जवाब - यह सभी देशों की स्वैच्छिक प्रतिबद्धता पर निर्भर है, लेकिन मुझे विश्वास है जयपुर की इस कॉन्फ्रेंस से शांति और सौहार्द का मजबूत संदेश जाएगा।
Updated on:
02 Aug 2026 02:05 am
Published on:
02 Aug 2026 01:28 am
