जयपुर

3.5 लाख लोगों के रोजगार पर संकट, 7700 साइटें प्रतिबंधित, अरावली आदेश से राजस्थान के इन उद्योगों पर पड़ रहा सीधा असर

Rajasthan Revenue Loss: अरावली पर्वतमाला की सीमाओं को लेकर हुए कथित तकनीकी भ्रम ने राजस्थान के खनन उद्योग को बड़े संकट में डाल दिया है। कई वास्तविक खदानों के साथ तालाब और डंपिंग यार्ड भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र घोषित होने से मार्बल और कैल्शियम उद्योग प्रभावित हुआ है।
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May 16, 2026
Aravalli Hills Order
फोटो: पत्रिका

Rajasthan News: अरावली पर्वतमाला की सीमाओं को लेकर आए कथित तकनीकी भ्रम के कारण न केवल वास्तविक खदानें, बल्कि तालाब और खाली डंपिंग यार्ड भी सरकारी फाइलों में प्रतिबंधित वन क्षेत्र घोषित हो चुके हैं। इससे मकराना के मार्बल से लेकर दुनिया भर में जाने वाले कैल्शियम तक के निर्यात ऑर्डर अब चीन और वियतनाम की झोली में गिर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मापन, सुनवाई और त्रुटि सुधार की व्यवस्था नहीं होने से खदान धारक परेशान हैं। इसके कारण अरावली श्रेणी में गलती से शामिल खदानें, स्टॉक और डंपिंग साइट भी बंद हो गईं।

वर्ष 2010 की फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर 31 मार्च 2025 को जारी इस आदेश पर सरकार की ओर से स्थानीय स्तर पर सुनवाई और सुधार की व्यवस्था नहीं है। इससे अरावली सीमा से बाहर की खदानें भी प्रभावित हो गई हैं। खननकर्ता मानकों और पैमानों के आधार पर अपनी खदान के प्रतिबंधित श्रेणी से बाहर होने की गुहार लगा रहे हैं। कच्चा माल उत्पादन बंद होने से संचालकों को मिले मार्बल और कैल्शियम के ऑर्डर निरस्त हो रहे हैं। मकराना के कैल्शियम उत्पादक निर्यातकों को माल नहीं दे पा रहे हैं। इससे उनके अनुबंध टूटने लगे हैं। पिछले दो महीने में एक ही कंपनी के पांच आपूर्ति आदेश निरस्त हो गए।

3.5 लाख के रोजगार पर संकट

इस उद्योग से राज्य में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 3.5 लाख से अधिक लोगों की आजीविका जुड़ी है। अजमेर, नागौर, डीडवाना, कुचामन, अलवर, जयपुर, राजसमंद, पाली, टोंक और भीलवाड़ा में हजारों स्टोन क्रशर और प्रोसेसिंग यूनिट संचालित हैं। इनमें श्रमिक, ट्रांसपोर्टर, निर्यातक और प्रवासी मजदूरों को रोजगार मिलता है। रोक के बाद इस उद्योग की हलचल थम गई है। कंपनियां समय पर आपूर्ति नहीं कर पाने के कारण जुर्माना भर रही हैं और कई विदेशी आयातक चीन, वियतनाम, इटली जैसे दूसरे देशों की ओर रुख करने लगे हैं।

राजस्व का बड़ा नुकसान

खनन पर रोक के चलते मार्बल, स्टोन के साथ पेंट, प्लास्टिक, रबर, पेपर और टूथपेस्ट जैसे घरेलू उद्योगों को कैल्शियम की आपूर्ति थम गई है। घरेलू उद्योग भी विदेशी शिपमेंट मंगवा रहे हैं। राजस्थान को 2024-25 में खनन से 9,228 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिला, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा अरावली बेल्ट से आया। 2025-26 में दिसंबर तक मिले 6,857 करोड़ रुपए में से 4,809 करोड़ रुपए अरावली क्षेत्र से जुड़े थे।

पारदर्शी प्रक्रिया की जरूरत

अरावली की रक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता है। इसे ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक तरीके से संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर शेष हिस्सों में कड़े पर्यावरणीय मानकों के साथ खनन जारी रखने की नीति बनाई जा सकती है। जिससे देश की आर्थिक प्रगति प्रभावित नहीं हो और पर्यावरणीय संतुलन भी बना रहे।
पीएन मिश्रा, भूगर्भ शास्त्री, नई दिल्ली

इस आदेश से मार्बल के साथ उसके सहायक उद्योगों को भी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। करीब 7700 साइट चिन्हित की गई हैं, जिनमें तालाब और डंपिंग साइट भी शामिल हो गई हैं। राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव से मुलाकात के बावजूद सुनवाई नहीं हुई। जो खदानें अरावली की प्राथमिक परिभाषा में नहीं आतीं, उन्हें तत्काल मुक्त करने की मांग की गई है।
उत्कर्ष बंसल, मार्बल एंड कैल्शियम एक्सपोर्टर, मकराना

हमारे हाथ में कुछ नहीं है, सब कुछ कोर्ट और सरकार के आदेश पर हुआ है। दो-चार महीने में स्थिति स्पष्ट हो सकती है। सूची में शामिल खदानों पर रोक जारी रहेगी और किसी भी राहत के लिए कोर्ट या शासन की नई गाइडलाइन का इंतजार करना होगा। राजस्व हानि हो रही है, वास्तविक आंकड़े अभी अपडेट नहीं हुए हैं।
सोमाराम मीणा, एमई, डीडवाना-कुचामन जिला

Updated on:
16 May 2026 06:45 am
Published on:
16 May 2026 06:45 am