राजस्थान विश्वविद्यालय में शुक्रवार को हुआ हंगामा अब एक नया और दिलचस्प मोड़ ले चुका है। जिस कार्यक्रम को लेकर NSUI ने 'रण' छेड़ा और पुलिस की लाठियां खाईं, अब उस पर 'फेक इनविटेशन' (Fake Invitation) का साया मंडरा रहा है।
राजस्थान की राजधानी जयपुर में स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय (RU) शुक्रवार को छावनी में तब्दील रहा। एक तरफ पुलिस और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और लाठीचार्ज हुआ, तो दूसरी तरफ 'इनविटेशन कार्ड' को लेकर एक बड़ा वैचारिक युद्ध छिड़ गया है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि जिस कार्यक्रम को NSUI ने 'RSS का वैचारिक एजेंडा' बताकर विरोध किया, वह असल में महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ा एक सामाजिक कार्यक्रम है, जिसे फर्जी कार्ड के जरिए विवादों में घसीटा गया।
NSUI ने जिस कार्ड को आधार बनाकर RSS के खिलाफ मोर्चा खोला था, भाजपा ने उसे पूरी तरह 'फर्जी' करार दिया है। भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर 'असली' इनविटेशन कार्ड जारी करते हुए कहा कि एनएसयूआई के नेताओं ने केवल सुर्खियां बटोरने के लिए भ्रामक अभियान चलाया। भाजपा का कहना है कि यह कार्यक्रम महिलाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण सामाजिक विषय पर था, जिसे जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया गया।
भाजपा नेताओं ने एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ और स्थानीय नेताओं की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। भाजपा की दलील है:
कार्ड के असली-नकली होने की बहस के बीच शुक्रवार को कैंपस का नजारा काफी हिंसक रहा।
विनोद जाखड़ और NSUI का आरोप है कि विश्वविद्यालय की कुलगुरु और राज्य सरकार अपने 'राजनीतिक आकाओं' को संतुष्ट करने के लिए कैंपस के शैक्षणिक माहौल को प्रदूषित कर रही हैं। उनका कहना है कि ज्ञान के केंद्रों में किसी विशेष विचारधारा का प्रचार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। हालांकि, भाजपा के 'फेक कार्ड' वाले दावे के बाद अब छात्र संगठन रक्षात्मक मुद्रा में नजर आ रहा है।
यह मामला अब केवल कैंपस तक सीमित नहीं है। भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज नेता सोशल मीडिया पर आमने-सामने हैं। एक तरफ 'पुलिसिया दमन' के आरोप लग रहे हैं, तो दूसरी तरफ 'फेक न्यूज' फैलाने के।