
NSUI protest
राजस्थान के सबसे बड़े उच्च शिक्षा केंद्र, राजस्थान विश्वविद्यालय में शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। कैंपस में RSS के एक वैचारिक संवाद और संविस्तार कार्यक्रम के आयोजन के विरोध में NSUI कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया। विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर पुलिस द्वारा की गई बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) करना पड़ा।
NSUI प्रदर्शन के दौरान छात्र नेता महेश चौधरी, रणवीर सिंघानिया, मनीष मेघवंशी, अमरदीप परिहार सहित कई नेता मौजूद रहे। प्रदर्शन की पूर्व सूचना के कारण जयपुर पुलिस ने सुबह से ही जेएलएन मार्ग और यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर भारी जाब्ता तैनात कर रखा था।
बैरिकेडिंग: पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए तीन लेयर की बैरिकेडिंग की थी।
झड़प: जैसे ही NSUI कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े, पुलिस के साथ उनकी झड़प हो गई।
एक्शन: भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां भांजी, जिसमें कुछ छात्रों को मामूली चोटें आई हैं। पुलिस ने मौके से कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर गांधीनगर थाने भेज दिया।
दरअसल, राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर में RSS द्वारा एक 'प्रबुद्ध जन संवाद एवं सांगठनिक विस्तार' कार्यक्रम का आयोजन किया जाना था। NSUI का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार शैक्षणिक संस्थानों का भगवाकरण करने की कोशिश कर रहे हैं। NSUI नेताओं का कहना है कि यूनिवर्सिटी शोध और ज्ञान का केंद्र है, न कि किसी विशिष्ट वैचारिक संगठन के प्रचार का मंच।
NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलगुरु (VC) को निशाने पर लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
"राजस्थान विश्वविद्यालय में RSS के कार्यक्रम का हम पुरज़ोर विरोध करते हैं। शैक्षणिक संस्थान ज्ञान के केंद्र होने चाहिए। RSS की विचारधारा संविधान, लोकतंत्र और आरक्षण के मूल्यों के विपरीत है। दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुलगुरु और राज्य सरकार अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए कैंपस का माहौल खराब कर रही हैं।" उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 30 सितंबर 2025 को हुए शस्त्र पूजन का भी विरोध किया गया था और यह संघर्ष जारी रहेगा।
वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि कार्यक्रम के लिए नियमानुसार अनुमति ली गई थी। प्रशासन का तर्क है कि विश्वविद्यालय में विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों के कार्यक्रम होते रहते हैं और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है। हालांकि, कैंपस के भीतर भारी पुलिस बल की मौजूदगी से सामान्य छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हुई है।
Updated on:
03 Apr 2026 03:16 pm
Published on:
03 Apr 2026 03:14 pm
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