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NEET Paper Leak : ‘पकड़े गए आरोपी BJP नेता, इसलिए नहीं हो रहा बुलडोज़र एक्शन’, भजनलाल सरकार पर अशोक गहलोत का नया वार

NEET पेपर लीक पर पूर्व CM अशोक गहलोत का भजनलाल सरकार पर तीखा हमला, कहा- आरोपी बीजेपी नेता हैं, इसलिए अब तक शांत खड़ा है बुलडोजर। संरक्षण देने का लगाया गंभीर आरोप।

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Ashok Gehlot On NEET Paper Leak

Ashok Gehlot On NEET Paper Leak

भारत की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET Exam) में हुए कथित महा-घोटाले और पेपर लीक की आंच अब राजस्थान की सियासत को पूरी तरह से झुलसाने लगी है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) द्वारा जयपुर की सड़कों पर किए गए हजारों कार्यकर्ताओं के ऐतिहासिक और आक्रामक घेराव प्रदर्शन के ठीक बाद, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने तीखे बयानों से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है।

अशोक गहलोत ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एक विस्तृत पोस्ट जारी कर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के आंतरिक अंतर्विरोधों की पोल खोली है और साथ ही यह सवाल दागा है कि अपराधियों के घरों पर तुरंत बुलडोजर चलाने का दम भरने वाली बीजेपी सरकारें आज इस मामले में इतनी लाचार और खामोश क्यों नजर आ रही हैं? गहलोत के इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक नया डिजिटल और जमीनी युद्ध छिड़ गया है।

'NTA अध्यक्ष का बयान गैर-जिम्मेदाराना'

अशोक गहलोत ने अपने हमले की शुरुआत सीधे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के शीर्ष नेतृत्व को आड़े हाथों लेते हुए की। उन्होंने संस्था के भीतर चल रही आपसी खींचतान और विरोधाभासी बयानों को देश के 24 लाख से अधिक परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ एक क्रूर मजाक बताया।

संसदीय समिति के सामने अजीब दावा: अशोक गहलोत ने अपनी पोस्ट में खुलासा किया कि, "NTA के अध्यक्ष श्री प्रदीप जोशी ने संसदीय समिति के सामने साफ कहा है कि वे नहीं मानते कि NEET का पेपर लीक था।"

गहलोत का तीखा विरोधाभास: पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि एक तरफ जब खुद NTA और सरकार ने विसंगतियों को देखते हुए कुछ जगहों पर पेपर रद्द करने या री-एग्जाम जैसी कड़े कदम उठाए हैं, तो दूसरी तरफ NTA के अध्यक्ष का संसदीय समिति के सामने ऐसा मुकर जाना उनकी गंभीर लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को साफ दर्शाता है।

'गहरी नींद में सो रहा है प्रशासनिक अमला'

अपनी पोस्ट में गहलोत ने जयपुर में कांग्रेस पार्टी और राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के बैनर तले हुए विशाल विरोध प्रदर्शन का भी पुरजोर जिक्र किया। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि युवाओं के इस जनाक्रोश को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।

आंखें मूंदकर बैठी है सरकार: गहलोत ने लिखा, "ऐसा लगता है कि राजस्थान सहित देशभर में बड़ी संख्या में लोगों के सड़कों पर आने के बाद भी इनकी आंखें नहीं खुल रही हैं।"

पीसीसी का ऐतिहासिक घेराव: उन्होंने आगे कहा कि कल जयपुर में पीसीसी द्वारा आयोजित कलेक्ट्रेट और प्रशासनिक दफ्तरों के घेराव में हजारों छात्र, अभिभावक और आम लोग उमड़ आए थे। इसके बावजूद, भाजपा की सरकार और स्थानीय प्रशासन अभी भी गहरी नींद में सो रहे हैं और जनता की चीख-पुकार सुनने को तैयार नहीं हैं।

'आरोपी बीजेपी के, इसलिए शांत है पीला पंजा!'

अशोक गहलोत ने इस विवाद में सबसे बड़ा और नया 'आउट ऑफ द बॉक्स' एंगल जोड़ते हुए बीजेपी की तथाकथित 'बुलडोजर नीति' पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार की नीयत पर सीधा उंगली उठाई है।

अशोक गहलोत का सबसे बड़ा प्रहार: "वैसे तो भाजपा सरकारें हर छोटे-बड़े मामले में तुरंत आरोपियों के घरों पर बुलडोजर भेज देती हैं, परंतु NEET पेपर लीक में इस बार भाजपा के अपने ही नेता और उनसे जुड़े लोग रंगे हाथों पकड़े गए हैं, इसलिए आज तक कोई सख्त कार्रवाई या बुलडोजर एक्शन नहीं हुआ है। यह साफ दिखाता है कि कहीं न कहीं इस पेपर लीक को भाजपा एवं सरकार के बड़े नेताओं का सीधा संरक्षण प्राप्त है, इसलिए पूरे मामले को रफा-दफा करने और सच को छिपाने के प्रयास किए जा रहे हैं।"

राजस्थान में पेपर लीक

राजस्थान की राजनीति में 'पेपर लीक' कोई नया शब्द नहीं है। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को पेपर लीक के मुद्दे पर ही घेरा था और अब पासा पूरी तरह से पलट चुका है। कांग्रेस इसी हथियार से भजनलाल सरकार पर चौतरफा वार कर रही है।

क्या पलटवार करेगी भजनलाल सरकार?

अशोक गहलोत द्वारा सीधे 'बीजेपी नेताओं के संरक्षण' का आरोप लगाए जाने के बाद अब गेंद पूरी तरह से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पाले में है। भाजपा के प्रदेश नेतृत्व और प्रवक्ताओं की टीम गहलोत के इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताने में जुट गई है। बीजेपी का तर्क है कि उनकी सरकार ने आते ही पेपर लीक माफियाओं के खिलाफ एसआईटी (SIT) का गठन किया है और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे उसका संबंध किसी भी दल से क्यों न हो। लेकिन, गहलोत द्वारा उठाए गए 'बुलडोजर की खामोशी' वाले सवाल का जवाब देना फिलहाल सरकार के लिए एक बड़ी गले की फांस बन चुका है।