
जयपुर। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने फर्जी आरजीएचएस अधिकारी बनकर अस्पताल प्रबंधन से रिश्वत लेने के आरोप में एक व्यक्ति को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से फर्जी पहचान-पत्र और विभागीय पत्र तैयार किए थे। इन दस्तावेजों के जरिए वह खुद को सरकारी अधिकारी बताकर अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई का दबाव बना रहा था।
एसीबी के अनुसार, आरोपी की पहचान बंशीपुरी प्रथम, जगतपुरा निवासी मनीष कुमार शर्मा के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कोई सरकारी लोक सेवक नहीं है। उसके खिलाफ धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने के संबंध में ज्योति नगर थाने में रिपोर्ट दी गई है।
जांच में पता चला कि मनीष कुमार ने AI की सहायता से संतोष कुमार शर्मा के नाम पर आरजीएचएस में जिला समन्वयक पद का फर्जी आईडी कार्ड तैयार किया था। इसके अलावा उसने डीडवाना-नागौर स्थित एसकेआई अस्पताल की ऑडिट के नाम पर 22 अगस्त 2026 की तारीख का एक फर्जी विभागीय पत्र भी बनाया।
इस पत्र पर क्रमांक 3350 अंकित था। आरोपी ने फर्जी दस्तावेज अस्पताल प्रबंधन को दिखाकर खुद को आरजीएचएस अधिकारी बताया। इसके बाद ऑडिट और विभागीय कार्रवाई का डर दिखाते हुए रिश्वत की मांग की।
एसीबी अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने शुरुआत में अस्पताल की ऑडिट करवाने के नाम पर 35 हजार रुपए मांगे थे। परिवादी की शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने आरोपों का सत्यापन कराया। इस दौरान आरोपी ने रिश्वत की रकम बढ़ाकर 45 हजार रुपए कर दी।
शिकायत की पुष्टि होने के बाद एसीबी ने ट्रैप की योजना बनाई। आरोपी ने मंगलवार को परिवादी को ज्योति नगर स्थित वित्त भवन के पास रिश्वत की रकम लेकर बुलाया था।
एसीबी जयपुर नगर-तृतीय की टीम ने निर्धारित स्थान पर कार्रवाई करते हुए मनीष कुमार को 40 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ लिया। टीम ने उसे आगे की कार्रवाई के लिए ज्योति नगर थाना पुलिस को सौंप दिया है। एसीबी उप महानिरीक्षक जयपुर-द्वितीय ओमप्रकाश मीणा के सुपरविजन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ज्ञान प्रकाश नवल के नेतृत्व में कार्रवाई की गई।
एसीबी के अनुसार, आरोपी से पूछताछ और उसके बताए नाम-पदनाम की जांच में प्रारंभिक तौर पर दोनों फर्जी पाए गए हैं। वह सरकारी कर्मचारी भी नहीं है। पुलिस अब फर्जी दस्तावेज तैयार करने, सरकारी अधिकारी बनकर धमकाने और रिश्वत वसूली के आरोपों की जांच कर रही है।