जयपुर

‘झूठा शपथपत्र’…शहर की बड़ी बीमारी: कागजों में नियम, जमीन पर मनमानी

जयपुर में शपथपत्र अब भरोसे का दस्तावेज नहीं, बल्कि सिस्टम की सबसे कमजोर कड़ी बन चुका है। जेडीए, नगर निगम, परिवहन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे विभाग आवेदकों से नियमों के पालन का शपथ पत्र लेकर जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं।
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Apr 05, 2026
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जयपुर। जयपुर में शपथपत्र अब भरोसे का दस्तावेज नहीं, बल्कि सिस्टम की सबसे कमजोर कड़ी बन चुका है। जेडीए, नगर निगम, परिवहन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे विभाग आवेदकों से नियमों के पालन का शपथ पत्र लेकर जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं। इसके बाद न तो सख्त निगरानी होती है और न ही उल्लंघन पर ठोस कार्रवाई की जा रही है। यही वजह है कि शहर में अवैध निर्माण, सडक़ पर पार्किंग और प्रदूषण जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
शपथपत्र अब भरोसे का नहीं, बल्कि औपचारिकता का दस्तावेज बनकर रह गया है। बिल्डिंग निर्माण, घर में पार्किंग, गोशाला से लेकर प्रदूषण नियंत्रण तक, हर जगह नियमों के पालन का वादा कागजों में किया जा रहा है, लेकिन हकीकत में उल्लंघन खुलकर सामने है। झूठे शपथ पत्र की वजह से शहर की सडक़ों पर जाम, अवैध निर्माण हो रहे हैं और आमजन की परेशानी बढ़ रही है।
जेडीए और नगर निगम से लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य महमकों में नियमों के पालन के लिए आवेदकों से शपथपत्र लेते हैं, इस शपथ पत्र को जिम्मेदार सच मान लेते हैं और इसकी आड़ में खूब मनमानी होती है।

यहां शपथ पत्र देकर बोला जा रहा सफेद झूठ

1. गाड़ी खरीदते समय: घर में गाड़ी खड़ी करने के लिए पर्याप्त जगह होने की बात शपथ पत्र में लिखते हैं।


हो रहा ये : शाम सात बजे के बाद शहर की अधिकतर कॉलोनियों में सडक़ के दोनों ओर गाडिय़ां खड़ी हो जाती हैं। गाड़ी को निकालना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार तो गाड़ी खड़ी करने को लेकर विवाद तक हो जाते हैं।

2. बिना अनुमति के निर्माण पकड़े जाने पर: जेडीए और निगम में भूखंडस्वामी शपथपत्र देता है कि वो निर्माण नियमों के तहत करेगा। सेटबैक में जो निर्माण है, उसे हटा लेगा।


हो रहा ये : 90 फीसदी मामले झूठे होते हैं। देरे सवेरे या फिर अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध निर्माण पूरे हो जाते हैं। जिम्मेदार अधिकारी एक बार भी जाकर नहीं देखते कि निर्माण नियमों के तहत हुआ है या नहीं। ऐसी इमारतों को सील किया गया और पांच से सात माह में ये खुल जाती हैं।

3. गोवंश को गोशाला से लाने पर: शपथपत्र दिया जाता है कि हम अपनी गाय को शहर से बाहर ले जाएंगे और खुले भी नहीं छोड़ेंगे।


हो रहा ये: हिंगोनिया गोशाला में करीब 20 हजार गोवंश है। शहर के परकोटा क्षेत्र से लेकर विद्याधर नगर, मालवीय नगर, दिल्ली रोड, आतिश मार्केट के आस-पास अवैध डेयरियेां का संचालन हो रहा है। सैकड़ों गाय रोज सडक़ों पर घूम रही हैं। जबकि, डेयरियों के व्यवस्थित संचालन के लिए शहर के बाहर रियायती दर पर जमीन भी आवंटित की जा चुकी है।

4. प्रदूषण नियंत्रण में भी झूठ: इंडस्ट्री और कॉमर्शियल यूनिट को काम की अनुमति के दौरान प्रदूषण मानकों का पालन करना होता है।


हो रहा ये: सांगानेर क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के लिए 12.3 एमएलडी क्षमता की सीईटीपी चालू है। यहां 892 इकाइयों को इससे जोड़ा जाना है। अभी तक 758 इकाइयां ही जुड़ सकी हैं। बाकी का गंदा पानी सीधे नदी में जा रहा है।

यहां भी हो रही मनमानी
-स्कूल आस्पताल: फायर सेफ्टी, पार्किंग, बिल्डिंग सेफ्टी की कई जगह अनदेखी की जा रही है।
-सरकारी योजनाएं: लाभ लेने के लिए आय, संपत्ति से लेकर पात्रता में गलत जानकारी देते हैं।

Updated on:
05 Apr 2026 08:16 am
Published on:
05 Apr 2026 08:16 am
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