जयपुर

राजस्थान में अब बड़े पैमाने पर युद्धक सामग्री का होगा निर्माण, भजनलाल सरकार ने तैयार किया बड़ा प्लान

राजस्थान सरकार नई एयरोस्पेस एंड डिफेंस नीति लेकर आई है, जिसका उद्देश्य प्रदेश को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का हब बनाना है। सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

2 min read
Jan 28, 2026
Bhajanlal Sharma
सीएम भजनलाल शर्मा (फोटो-पत्रिका)

जयपुर। राजस्थान सरकार ने एयरोस्पेस और डिफेंस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राजस्थान एयरोस्पेस एंड डिफेंस पॉलिसी लागू की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार विकसित राजस्थान के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बहुआयामी विकास रणनीति पर काम कर रही है। कृषि, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा और उद्योग के साथ-साथ अब एयरोस्पेस एवं डिफेंस विनिर्माण को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

नई नीति का उद्देश्य राज्य में एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण तथा सेवाओं में आत्मनिर्भरता को मजबूत करना और देश के एयरोस्पेस-डिफेंस सेक्टर में राजस्थान की भागीदारी बढ़ाना है। इसके तहत बड़े निवेश को आकर्षित करने के साथ एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवाचार आधारित इकोसिस्टम के विकास पर फोकस किया गया है, जिससे आर्थिक गतिविधियों को गति और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

युद्धक सामग्री का होगा निर्माण

नीति के अंतर्गत एयरोस्पेस और डिफेंस क्षेत्र से जुड़े विनिर्माण उद्यमों, उपकरण एवं घटक निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, प्रिसीजन इंजीनियरिंग इकाइयों तथा मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (एमआरओ) सेवाओं की स्थापना को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

निवेश के आधार पर परियोजनाओं का वर्गीकरण

नीति के तहत विनिर्माण परियोजनाओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 50 करोड़ से 300 करोड़ रुपये तक के अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं ‘लार्ज’, 300 करोड़ से 1,000 करोड़ रुपये तक ‘मेगा’ और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली परियोजनाएं ‘अल्ट्रा मेगा’ श्रेणी में आएंगी। वहीं, सर्विस सेक्टर में 25 से 100 करोड़ रुपये तक निवेश पर लार्ज, 100 से 250 करोड़ रुपये तक मेगा और 250 करोड़ रुपये से अधिक निवेश पर अल्ट्रा मेगा श्रेणी निर्धारित की गई है।

विनिर्माण और सेवा इकाइयों को मिलेंगे प्रोत्साहन

ए एंड डी पार्कों में स्थापित पात्र एयरोस्पेस और डिफेंस इकाइयों को 7 वर्षों तक राज्य कर का 75 प्रतिशत पुनर्भरण एसेट क्रिएशन इंसेंटिव के रूप में दिया जाएगा। इसके साथ ही विनिर्माण इकाइयों को 20 से 28 प्रतिशत और सर्विस सेक्टर को 14 से 20 प्रतिशत तक पूंजीगत अनुदान या 10 वर्षों तक 1.2 से 2 प्रतिशत टर्नओवर लिंक्ड इंसेंटिव में से किसी एक विकल्प को चुनने की सुविधा होगी।

बढ़ेगा रोजगार

इसके अतिरिक्त रोजगार बढ़ाने पर एम्प्लॉयमेंट बूस्टर, शुरुआती मेगा और अल्ट्रा मेगा इकाइयों के लिए सनराइज बूस्टर, एंकर और थ्रस्ट बूस्टर जैसे अतिरिक्त लाभ भी दिए जाएंगे। रीको से भूमि लेने वाली मेगा और अल्ट्रा मेगा इकाइयों को फ्लेक्सिबल लैंड पेमेंट और ऑफिस स्पेस के लिए लीज रेंटल सब्सिडी का लाभ मिलेगा।

निवेशकों के लिए विशेष सुविधाएं

नीति में बैंकिंग, व्हीलिंग और ट्रांसमिशन चार्ज में छूट, फ्लेक्सिबल लैंड पेमेंट मॉडल, ऑफिस स्पेस लीज सब्सिडी और कैप्टिव पावर प्लांट में निवेश को पात्र पूंजी निवेश में शामिल करने जैसे विशेष प्रावधान किए गए हैं। इसके साथ ही 7 वर्षों तक बिजली शुल्क से पूर्ण छूट, मंडी शुल्क का शत-प्रतिशत पुनर्भरण, स्टाम्प और रूपांतरण शुल्क में छूट तथा ग्रीन, स्किल और बौद्धिक संपदा सृजन से जुड़े प्रोत्साहन भी नीति का हिस्सा हैं।

Published on:
28 Jan 2026 08:17 pm