Film Padmavat Controversy: फिल्म राजस्थान और अन्य कुछ राज्यों को छोड़कर देश भर में 25 जनवरी को रिलीज़ होने जा रही है।
जयपुर।
संजय लीला भंसाली निर्देशित फिल्म पद्मावती भले ही भारी बवाल के बाद अब बदले नाम से सिनेमाघरों के बाहर रिलीज़ होने जा रही हो, लेकिन राजस्थान में इस फिल्म को लेकर विवाद अभी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। गौरतलब है कि ये फिल्म राजस्थान और अन्य कुछ राज्यों को छोड़कर देश भर में 25 जनवरी को रिलीज़ होने जा रही है।
इस बीच राजस्थान में फिल्म रिलीज़ का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा फैंस का एक वर्ग इसे देखने के लिए नए-नए तरीके खोज निकालने में जुटा हुआ है। वैसे सोशल मीडिया के इस दौर में हाईटेक दर्शक वर्ग का फिल्म देखना कोई ज़्यादा मुश्किलों भरा नहीं होगा।
फिल्म पद्मावत देखने का इंतज़ार कर रहे वैशाली नगर निवासी तरुण कहते हैं कि फिल्म रिलीज़ से कुछ दिन पहले या फ़ौरन बाद इसका पाइरेटेड वर्ज़न बाज़ार में आ जाएगा। आजकल हर फिल्म को आसानी से इस माध्यम से लेकर देखा जा सकता है। वे कहते हैं कि पद्मावत भी इसी तरह से आसानी से उपलब्ध हो जायेगी।
राजा पार्क निवासी पिंकी सोनी का कहना है कि राजस्थान में फिल्म पद्मावत रिलीज़ नहीं हो रही इसकी मायूसी तो है लेकिन फिर भी उन्हें उम्मीद है कि इसे बड़े परदे की जगह कम्प्यूटर या मोबाइल पर वे देख सकेंगी।
कई ने तो गुड़गांव जाने का किया प्लान
राजस्थान में फिलहाल फिल्म पद्मावत पर बैन रखा गया है। लिहाज़ा इसे बड़े परदे पर देखने की छह रखने वालों ने नई तरकीब तक निकाल ली है। राजधानी जयपुर के मुरलीपुरा निवासी स्वाति कहती हैं कि उन्होंने परिवार संग फिल्म पद्मावत देखने की प्लानिंग कर ली है। इसके लिए वे जयपुर के सबसे नज़दीक पड़ने वाले गुड़गांव जाएंगे और वहां इस फिल्म को देखेंगे।
स्वाति के परिवार की ही तरह सी-स्कीम के रहने वाले रजत और उनके मित्रों ने भी ऐसी ही प्लानिंग की है। ये सभी यहां से गुड़गांव के थियेटर्स में एडवांस बुकिंग करवाकर फिल्म देखने का इरादा बना चुके हैं।
सोशल मीडिया भी रहेगा सक्रीय
फिल्म पद्मावत लम्बे बवाल के बाद आखिरकार रिलीज़ हो रही है। जब से ये बवाल शुरू हुआ था तब से ये फिल्म सोशल मीडिया पर चर्चा में रही है। फिल्म का ट्रेलर और गाने पहले ही सोशल मीडिया में धमाल मचा चुके हैं। यू-ट्यूब में जहां ट्रेलर और घूमर सॉन्ग को रिकॉर्ड बार देखा गया है। वहीं ट्विटर और फेसबुक में भी फैंस के बीच ये फिल्म चर्चा का विषय बनी रही। ऐसे में ज़ाहिर सी बात है कि अन्य राज्यों में रिलीज़ होने के बाद भी इस फिल्म को आसानी से देखा जा सकता है।
23 जनवरी से पहले हाईकोर्ट को दिखानी होगी फिल्म
प्रदेश में पद्मावत फिल्म हाईकोर्ट को 23 जनवरी से पहले दिखानी होगी। हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माण के दौरान डीडवाना में दर्ज एफआईआर पर निर्णय करने से पहले फिल्म दिखाने का निर्देश दिया है।
न्यायाधीश संदीप मेहता ने निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली ने फिल्म निर्माण के दौरान डीडवाना में दर्ज एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया हुआ है। कोर्ट ने कहा था कि एफआईआर में लगाए आरोपों की सच्चाई फिल्म देखने के बाद ही पता लग सकते के बारे में पता चल सकता है, इसलिए फिल्म को दिखाने की व्यवस्था की जाए।
इस पर भंसाली के अधिवक्ता निशांत बोड़ा ने कहा कि याचिकाकर्ता से पूछ कर ही इस बारे में जवाब दिया जा सकता। कोर्ट ने इस पर मामले की सुनवाई 23 जनवरी तय की है और निर्माता निर्देशक को 23 जनवरी से पहले फिल्म कोर्ट को दिखानी होगी।
इससे पहले सरकार की ओर से पैरवी करते हुए जेपी भारद्वाज ने कहा कि फिल्म विवादों मे है। ऐसे में पुलिस को अनुसंधान करने दिया जाए, एफआईआर निरस्त नहीं की जाए। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता बोडा ने कहा कि ना तो फिल्म को अभी प्रदर्शित किया है और ना ही ट्रेलर जारी हुआ है।
ऐसे में हाईकोर्ट ने कहा कि फिल्म पहले कोर्ट मे दिखाई जाए। अधिवक्ता बोडा ने इसके लिए समय चाहा और कहा कि निर्माता निर्देशक से पूछ कर बताएंगे कि फिल्म कब तक कोर्ट में प्रदर्शित की जाए। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को 23 जनवरी तक समय देते सुनवाई को मुलतवी कर दिया।
देश भर में लगाएंगे जनता कर्फ्यू: कालवी
राजपूत करणी सेना के संस्थापक लोकेन्द्र सिंह कालवी ने कहा है कि अब इस फिल्म के विरोध में देश भर में जनता कर्फ्यू लगाया जाएगा। उनका कहना है कि सेंसर बोर्ड की ओर से इस फिल्म को रिलीज की मंजूरी देने से पहले तीन विशेषज्ञों की समिति को दिखाया गया जिन्होंने इस पर प्रतिबंध लगाने की बात कही।
'बाहुबली जैसी फिल्में बनाएं'
कालवी ने कहा कि फिल्मकारों को ऐतिहासिक तथ्यों पर फिल्में ही बनानी हैं तो बाहुबली जैसी फिल्में बनाएं। फिल्म पद्मावती पर ही बनाइए। इसमें कहीं कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन ऐतिहासिक तथ्यों से तोड़-मरोड़क़र फिल्में नहीं बनाई जानी चाहिए। फिल्म में अलाउद्दीन खिलजी की प्रेमिका को दिखाकर नहीं बनाएं। ये तो कम से कम नहीं चलेगा। बाहुबली भी राजपूतों और क्षत्रिय पर ही बनी हुई फिल्म है।
उन्होंने कहा कि तीन लोगों की विशेषज्ञ समिति ने भी इस फिल्म को देखकर पूर्णतया प्रतिबंध की बात कही, लेकिन फिर से इस फिल्म को रिलीज की मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो फिल्म देखी और न ही देखेंगे।
पद्मावती से ‘आई’ क्यों हटाया, ‘पी’ क्यों नहीं?
कालवी के अनुसार पद्मावती में से आई क्यों हटाया, इसका उन्हें आश्चर्य है, पी क्यों नहीं हटाया गया। ये एक तमाशा सा हो गया है। सेंसर बोर्ड ने कुछ पत्रकारों को ही यह फिल्म क्यों दिखाया।
इतने बड़़े स्तर पर पहली बार विरोध
जिस तरह जोधा अकबर की तरह जनता कफ्र्यू लगाया था उसी तरह इस फिल्म पर देशव्यापाी जनता कर्फ्यू लगाएंगे। इस तरह से पहली बार यह होगा इतने बड़े तरह से किसी फिल्म का इस स्तर पर विरोध हो रहा है। इतिहास से जोडक़र इस फिल्म को देखने वाले समान विचारधारा वाले लोगों की एक राय है कि फिल्म पद्मावती पर प्रतिबंध लगाएं।
विशेषाधिकार का प्रयोग करें प्रधानमंत्री
कालवी के मुताबिक वे चाहते हैं कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करें और इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाएं। प्रधानमंत्री को सिनेमैटोग्राफ एक्ट की धारा 6/1/2 के तहत विशेषाधिकार का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने भंसाली की फितरत पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि भंसाली की फितरत है हरदम विवाद में रहना। बाजीराव मस्तानी और रासलीला के कारण ही वे विवादों में रहे थे।