
मुंबई. ठाकुरद्वार स्थित श्री आदेश्वर जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ के आदेश्वर भवन में चातुर्मासार्थ विराजित साध्वी भव्यगुणा ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का समय नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और आत्मविकास का दुर्लभ अवसर है। उन्होंने कहा कि इस पावन काल में गुरुभगवंतों का सान्निध्य प्राप्त होने से साधक अपने जीवन को आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से प्रभुदर्शन, संतदर्शन, प्रवचन श्रवण, सामायिक, प्रतिक्रमण, स्वाध्याय, तप और धर्म आराधना को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अपनी कमियों को पहचानकर शुद्ध धर्माचरण की ओर बढऩा ही सच्चा आत्मकल्याण है। धर्मसभा में साध्वी शीतलगुणा ने कहा कि चातुर्मास आत्मा की आराधना, संयम और सदाचार का पावन पर्व है, जिसका सदुपयोग प्रत्येक श्रद्धालु को करना चाहिए। इस अवसर पर जयंतीलाल बाफना, मोहनलाल पोरवाल, कमलेश पांचसौ वोरा, जबरमल पांचसौवोरा, महेंद्र पांचसौवोरा, अशोक श्रीमाल, संजय वाणीगोता, मांगीलाल जैन, मनोज शोभावत, मफीबाई दरगचंद तथा पवनदेवी रमेश कुमार लुंकड़ परिवार ने दर्शन-वंदन सेवा का लाभ लिया। संघ अध्यक्ष हसमुख जैन ने बताया कि 2 अगस्त से निगोद निवारण तप का शुभारंभ होगा।