
जीत का जश्न मनाते सीएम भजनलाल और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़
राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका चुनावों के परिणामों ने प्रदेश की राजनीति में एक नया और हैरान कर देने वाला अध्याय लिख दिया है। राज्य की कई ऐसी नगर पालिकाओं और परिषदों में जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास केवल नाममात्र के पार्षद जीतकर आए थे, वहां पार्टी ने अपनी रणनीतिक बिसात, निर्दलीयों के समर्थन और जमीनी सियासी जोड़-तोड़ के बल पर अपना अध्यक्ष और सभापति बनाकर सभी को चौंका दिया है। हनुमानगढ़ जिले के नोहर में मात्र 2 पार्षदों वाली भाजपा द्वारा 40 सदस्यों के बोर्ड में अपना अध्यक्ष बना लेना हो या फिर झालावाड़ के पिड़ावा व झालरापाटन में कांग्रेस को पछाड़कर बाजी मारना, प्रदेश भर के निकायों में 'ऑपरेशन लोटस' की गूंज साफ सुनाई दे रही है। अधिक पार्षदों के साथ पूर्ण बहुमत के करीब दिख रही कांग्रेस पार्टी कई जगहों पर महज देखते ही रह गई और रणनीतिक चूक के कारण सत्ता से बाहर हो गई।
हनुमानगढ़ जिले की नोहर नगर पालिका का चुनाव परिणाम राजस्थान निकाय चुनाव के इतिहास में सबसे अप्रत्याशित माना जा रहा है। 40 वार्डों वाली नोहर नगर पालिका में कांग्रेस पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 20 वार्डों में जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी को मात्र 2 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा था। बाकी 18 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कब्जा जमाया था।
कांग्रेस को बोर्ड बनाने के लिए केवल 1 निर्दलीय पार्षद की जरूरत थी, लेकिन भाजपा के स्थानीय नेतृत्व ने राजनीतिक बाजी पलटते हुए सभी 18 निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में साध लिया।
2 अपने और 18 निर्दलीयों के साथ भाजपा का आंकड़ा 20 पर पहुंच गया और लॉटरी व रणनीतिक समीकरणों के सहारे भाजपा ने नोहर नगर पालिका की कमान अपने नाम कर ली, जबकि 20 पार्षदों वाली कांग्रेस मुंह देखती रह गई।
झालावाड़ जिले की पिड़ावा और पूर्व मुख्यमंत्री के गढ़ माने जाने वाले झालरापाटन नगर पालिका में भी कुछ ऐसा ही अजीबोगरीब सियासी गणित देखने को मिला। पिड़ावा नगर पालिका में कांग्रेस पार्टी के पास स्पष्ट रूप से ज्यादा वोट और अधिक पार्षद मौजूद थे। लेकिन अंतिम समय में भाजपा ने आम आदमी पार्टी (AAP) के पार्षदों और निर्दलीयों को अपने साथ जोड़कर बोर्ड बनाने का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया।
इसी तरह झालरापाटन में भी कांग्रेस की गुटबाजी का फायदा उठाते हुए भाजपा ने अपने रणनीतिक प्रबंधन के दम पर अध्यक्ष पद की कुर्सी अपने नाम कर ली। इन दोनों निकायों में कांग्रेस बहुमत के करीब होकर भी अंदरूनी खींचतान के कारण अपना बोर्ड बनाने में पूरी तरह नाकाम रही।
राजस्थान के इन विभिन्न निकायों के नतीजों का विश्लेषण करें तो साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस पार्टी अपनी अंदरूनी गुटबाजी और निर्दलीय पार्षदों को एकजुट रखने में असफल रही। दूसरी ओर, भाजपा के प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय रणनीतिकारों ने माइक्रो-लेवल पर मैनेजमेंट करते हुए एक-एक निर्दलीय पार्षद से व्यक्तिगत संपर्क साधा और उन्हें अपने साथ जोड़ा।
'अल्पमत' वाली सीटों को 'बहुमत' में बदलने का यह मॉडल अब पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बना हुआ है। 25 सितंबर को होने वाले जयपुर, जोधपुर और कोटा जैसे बड़े नगर निगमों के महापौर चुनावों से ठीक पहले इन छोटे निकायों के नतीजों ने दोनों ही प्रमुख दलों के खेमों में हलचल तेज कर दी है।
राजस्थान नगरीय निकाय प्रमुख (महापौर/मेयर, सभापति और अध्यक्ष) के चुनावों के नतीजे आ चुके हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड एकतरफा बढ़त हासिल की है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 301 नगरीय निकायों में से 194 से अधिक निकायों पर भाजपा ने अपने बोर्ड बनाए हैं, जबकि कांग्रेस को 94 निकायों में ही संतोष करना पड़ा है। 5 स्थानों पर निर्दलीय और 1-1 स्थान पर आम आदमी पार्टी (AAP), आरएलपी (RLP) और माकपा का बोर्ड बना है।
प्रमुख 7 नगर निगमों के घोषित चुनाव परिणामों और उनमें नव-निर्वाचित महापौर (मेयर) की पूरी सूची इस प्रकार है:
| नगर निगम | नव-निर्वाचित महापौर (मेयर) | पार्टी | चुनावी स्थिति और विवरण |
|---|---|---|---|
| अजमेर | अनामिका शर्मा | भाजपा | कांग्रेस की किरण को 43-37 के अंतर से हराया। पार्षदों की संख्या कम होने के बावजूद निर्दलीयों की मदद से जीत दर्ज की। |
| उदयपुर | पारस सिंघवी | भाजपा | कांग्रेस की पूनम को 55-25 के भारी अंतर से शिकस्त दी। |
| अलवर | सुमनलता अग्रवाल | भाजपा | कांग्रेस की कमलेश को 42-23 वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की। |
| पाली | नमिता बुबकिया | भाजपा | बेहद कड़े मुकाबले में निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला को 33-29 वोटों से मात दी। |
| भरतपुर | अनुराधा सिंह | भाजपा | यहाँ कांग्रेस समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी विचित्रा सिंह द्वारा नामांकन वापस लेने के बाद निर्विरोध चुनी गईं। |
| भीलवाड़ा | जसवंत कंवर | भाजपा | कांग्रेस या अन्य किसी दल द्वारा नामांकन न भरे जाने के कारण निर्विरोध निर्वाचन हुआ। |
| बीकानेर | अनिल कल्ला | कांग्रेस | पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला ने भाजपा के सुरेंद्र को 50-30 वोटों से हराया। यह कांग्रेस के लिए एकमात्र निगम रहा। |
राज्य के तीन बड़े शहरों—जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम—तथा कोटा जिले की सुकेत नगर पालिका में कुछ वार्डों में हुए पुनर्मतदान के कारण चुनाव कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया था। इन निकायों में महापौर और अध्यक्ष पद के लिए मतदान आगामी 25 सितंबर 2026 को करवाया जाएगा।
Updated on:
22 Sept 2026 02:52 pm
Published on:
22 Sept 2026 02:52 pm
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