जयपुर

Gangaur Festival: जयपुर में गणगौर महोत्सव, इस बार शाही सवारी में दिखेगी विशेष परम्परा और भव्यता का संगम

Gangaur Shobha Yatra: 210 लोक कलाकार और 32 लवाजमों के साथ गणगौर महोत्सव बनेगा ऐतिहासिक आयोजन। गणगौर सवारी का होगा लाइव प्रसारण, दुनिया देखेगी राजस्थान की सांस्कृतिक झलक। भव्यता के नए आयाम रचेगा गणगौर महोत्सव—2026, जयपुर में दिखेगा संस्कृति का अद्भुत संगम।
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Mar 20, 2026
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Gangaur Shobha Yatra: जयपुर. राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक वैभव का प्रतीक गणगौर महोत्सव इस वर्ष राजधानी जयपुर में अभूतपूर्व भव्यता और नवीन प्रयोगों के साथ आयोजित होने जा रहा है। पर्यटन विभाग ने इसकी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है और इस बार आयोजन को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं ।

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के निर्देश पर महोत्सव में कई नवाचार जोड़े गए हैं, जिनमें सबसे खास है गणगौर की शाही सवारी का लाइव प्रसारण । राजस्थान फाउंडेशन के माध्यम से विदेशों में बसे भारतीयों और राजस्थानी समुदाय को इस भव्य आयोजन से जोड़ने की पहल की गई है। साथ ही, पर्यटन विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इसका सीधा प्रसारण किया जाएगा, जिससे दुनिया भर के लोग जयपुर की इस सांस्कृतिक धरोहर का आनंद ले सकेंगे ।

गणगौर की शाही सवारी 21 और 22 मार्च को शाम 5:45 बजे सिटी पैलेस परिसर से रवाना होगी। यह शोभायात्रा त्रिपोलिया गेट, छोटी चौपड़ और गणगौरी बाजार होते हुए तालकटोरा/पौंड्रिक पार्क तक पहुंचेगी । इस दौरान पूरा शहर लोक संस्कृति के रंग में रंगा नजर आएगा ।

इस वर्ष शोभायात्रा को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए 32 पारंपरिक लवाजमे शामिल किए गए हैं, जिनमें सजी-धजी पालकियां, ऊंट, घोड़े, हाथी, बैंड, रथ और विक्टोरिया कैरिज प्रमुख हैं। शंकर बैंड का नया समावेश भी दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहेगा ।

महोत्सव में प्रदेशभर से चयनित करीब 210 लोक कलाकार अपनी-अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे । कच्छी घोड़ी, गेर, कालबेलिया, चरी, घूमर और चंग जैसे पारंपरिक लोकनृत्य इस शोभायात्रा की विशेष पहचान होंगे। इसके साथ ही शहनाई, मशक, रावणहत्था और भपंग जैसे वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनियां वातावरण को सुरमयी बनाएंगी। बहुरूपिया, मांगणियार गायन और कठपुतली जैसे लोक रूप भी दर्शकों को आकर्षित करेंगे ।

गणगौर महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राजस्थान की लोक विरासत को सहेजने और नई पीढ़ी से जोड़ने का सशक्त माध्यम है । यह पर्व महिलाओं की आस्था, सौभाग्य और भगवान शिव-पार्वती के प्रति समर्पण का प्रतीक है और प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को देश-विदेश में स्थापित करता है ।

Updated on:
20 Mar 2026 10:21 pm
Published on:
20 Mar 2026 10:21 pm