Forbes 30 Under 30: गिरीश मेहता और अनीषा शर्मा जिन्होंने खुद अनाथालयों में अपना बचपन बिताया आज अपने स्टार्टअप के जरिए अनाथालय से बाहर आने वाले युवाओं की जिंदगी बदल रहे हैं।
Startup CLiC Of Girish Mehta And Anisha Sharma: जयपुर के गिरीश मेहता और अनीषा शर्मा ने साबित कर दिया कि अगर निजी संघर्ष समाज के लिए समाधान बन जाए, तो उसका असर बहुत दूर तक जाता है। इन दोनों का स्टार्टअप केयरलीवर्स इनर सर्कल फोरम (CLiC) 18 साल के बाद अनाथालयों से बाहर निकलने वाले युवाओं की मदद करता है, फोर्ब्स इंडिया की 30 अंडर 30 सूची में शामिल हुआ। 2021 में शुरू हुआ यह स्टार्टअप आज राजस्थान, उत्तराखंड, गुरुग्राम और पश्चिम बंगाल में सक्रिय है।
गिरीश और अनीषा दोनों का बचपन बहुत कठिनाइयों से भरा हुआ था। दोनों ने खुद अनाथालय में बचपन बिताया था और अब वे स्टार्टअप के जरिए उन बच्चों और युवाओं के लिए सहारा बन रहे हैं जो अनाथालय से बाहर आकर संघर्ष करते हैं।
गिरीश मेहता का जन्म राजस्थान के एक छोटे से गांव में हुआ था। 8 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया और फिर उनकी मां ने उन्हें मुंबई भेजा ताकि वे पढ़ाई कर सकें। लेकिन मुम्बई में उनके चाचा ने उन्हें काम में लगा दिया। जब उनकी मां को इस बारे में पता चला, तो वह उन्हें वापस राजस्थान लेकर आ गई और 12 साल की उम्र में गिरीश को चाइल्ड केयर संस्थान में भेज दिया। यहां गिरीश ने अपनी पढ़ाई पूरी की लेकिन 18 साल की उम्र में जब उन्हें घर छोड़ने को कहा गया तो वह पूरी तरह से अनजान थे कि आगे क्या होगा।
18 साल की उम्र में गिरीश को नौकरी की तलाश शुरू करनी पड़ी और उन्होंने एक चाइल्ड हेल्पलाइन में काम करना शुरू किया। यहीं उन्हें उनके जैसे कई और लोग भी मिले जो उनकी जैसी समस्याओं का सामना कर रहे थे। जिसके बाद 2019 में गिरीश ने एक व्हाट्सएप ग्रुप शुरू किया ताकि अनाथालयों से बाहर निकलने वाले युवाओं को एक-दूसरे की मदद मिल सके।
इसके बाद 2021 में गिरीश ने यूनीसेफ से मदद ली और स्टार्टअप की शुरुआत की जिसका उद्देश्य केयरलीवर्स को डॉक्यूमेंट, सरकारी स्कीम्स का लाभ, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और अन्य जरूरतों में मदद करना था।
अनीषा शर्मा का बचपन भी बहुत मुश्किल था। दिल्ली में जन्मी अनीषा और उनके भाई को उनके माता-पिता ने छोड़ दिया था और उन्हें चाइल्ड केयर संस्थान में भेज दिया गया। 18 साल की उम्र में अनीषा को भी वही समस्या आई, जब उसे अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी क्योंकि उसके पास फीस का पैसा नहीं था।
अनीषा और उसके भाई ने बाहर की दुनिया का सामना किया और उन्हें अपनी जिंदगी चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। अनीषा ने शुरुआत में छोटे-मोटे काम किए और फिर कॉल सेंटर और मार्केटिंग जैसी नौकरी में आगे बढ़ी। इस दौरान अनीषा को एहसास हुआ कि बहुत से केयरलीवर्स ऐसे हैं, जिन्हें वही समस्याएं झेलनी पड़ती हैं जो उसने खुद झेली थीं। इसी प्रेरणा से वह गिरीश के साथ स्टार्टअप में जुड़ीं और मदद करने का निर्णय लिया।
2023 में अनीषा ने स्टार्टअप का मुद्दा महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी के सामने उठाया। इसके बाद सरकार ने केयरलीवर्स के लिए एक नई नीति बनाई, जिसमें राज्यों को एक सुरक्षित डेटाबेस और आफ्टरकेयर सेवाएं विकसित करने का आदेश दिया गया।
आज स्टार्टअप ने 1,500 से ज्यादा केयरलीवर्स को मदद दी है, जिनमें राजस्थान, दिल्ली, गुजरात, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के लोग शामिल हैं। यह संस्था बच्चों को शेल्टर, नौकरी, दस्तावेज़ बनवाने, मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी सेवाएं प्रदान करती है। स्टार्टअप ने एक डिजिटल पोर्टल भी शुरू किया है, जहां केयरलीवर्स पंजीकरण कर सकते हैं और अपनी जरूरतों के अनुसार सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
गिरीश और अनीषा ने अपने संघर्षों से ये साबित कर दिया है कि यदि दिल में सही उद्देश्य हो तो किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। उनकी कड़ी मेहनत और समाज के प्रति योगदान के लिए उन्हें हाल ही में फोर्ब्स 30 अंडर 30 की लिस्ट में जगह मिली।
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