Wildlife Conservation: सरकार ने बढ़ाए संरक्षण प्रयास। मरुस्थल की शान गोडावण को बचाने के लिए सरकार अलर्ट, युवाओं से भी की खास अपील। जैसलमेर में मनाया गया गोडावण दिवस।
Great Indian Bustard: जयपुर/जैसलमेर। राजस्थान की पहचान और मरुस्थल की शान माने जाने वाले राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) को बचाने के लिए अब सरकार ने संरक्षण अभियान को और तेज कर दिया है। तेजी से घटती संख्या के कारण दुनिया के सबसे दुर्लभ पक्षियों में शामिल हो चुके गोडावण को लेकर प्रदेश सरकार लगातार बड़े कदम उठा रही है। यही वजह है कि अब जैसलमेर में संचालित ब्रीडिंग सेंटरों से उम्मीद की नई किरण दिखाई देने लगी है।
गुरुवार को जैसलमेर के उत्कर्ष जैन भवन में आयोजित गोडावण दिवस समारोह में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार गोडावण संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में सरकार वैज्ञानिक तकनीक, आधुनिक प्रबंधन और जनसहभागिता के जरिए इस दुर्लभ पक्षी को बचाने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि गोडावण केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि राजस्थान की जैव विविधता, प्राकृतिक धरोहर और मरुस्थलीय पारिस्थितिकी का सबसे बड़ा प्रतीक है। अगर समय रहते इसे सुरक्षित नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियां इसे सिर्फ तस्वीरों में ही देख पाएंगी। यही कारण है कि सरकार अब संरक्षण के साथ-साथ जन-जागरूकता पर भी विशेष फोकस कर रही है।
कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा सम और रामदेवरा में संचालित गोडावण ब्रीडिंग सेंटरों की रही। वन विभाग के अनुसार इन केंद्रों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं। गोडावण की संख्या में धीरे-धीरे बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है और उनकी प्रजनन क्षमता में भी सुधार हुआ है। विशेषज्ञ इसे राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
वन राज्य मंत्री ने युवाओं और विद्यार्थियों से प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि केवल सरकारी प्रयासों से गोडावण को नहीं बचाया जा सकता, इसके लिए आमजन की भागीदारी बेहद जरूरी है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अब गोडावण संरक्षण अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा ताकि नई पीढ़ी इस दुर्लभ पक्षी के महत्व को समझ सके।
कार्यक्रम में जैसलमेर विधायक छोटू सिंह भाटी ने कहा कि गोडावण राजस्थान की संस्कृति, पहचान और गौरव का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने बताया कि सुरक्षित आवास, आधुनिक प्रबंधन और जागरूकता अभियानों के कारण संरक्षण प्रयासों को मजबूती मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण प्रयास जारी रहे तो आने वाले वर्षों में गोडावण की संख्या में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल राजस्थान इस दुर्लभ पक्षी को बचाने की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरा है।