हर कोई ये जानने के लिए उत्सुक हो रहा है कि आज सोने-चांदी के भाव में बढ़ोतरी हुई है या गिरावट आई है? और क्या अभी सोना या चांदी खरीदने का सही वक्त है?
सोना और चांदी के बाजार में पिछले दो दिनों से उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है, जिसने सोना-चांदी के कारोबार से जुड़े व्यवसाइयों से लेकर आम लोगों तक के बीच हलचल मचाकर रखी हुई है। हर कोई ये जानने के लिए उत्सुक हो रहा है कि आज सोने-चांदी के भाव में बढ़ोतरी हुई है या गिरावट आई है? इन सब के बीच सोना-चांदी के भाव हर दिन नए रिकॉर्ड्स बना रहे हैं।
शनिवार, 31 जनवरी 2026 की सुबह तक बाजार में जो अस्थिरता रही, उसे लेकर जयपुर के ज्वेलरी कारोबारियों और इस क्षेत्र से जुड़े एस्पर्ट्स खरीदारों को 'बाय ऑन डिप' यानी गिरावट पर खरीदारी की सलाह दे रहे हैं।
जयपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन के सदस्य मनीष खुंटेटा के अनुसार, 'इतिहास में पहली बार शुक्रवार को एक ही दिन के भीतर 65 हज़ार रुपए तक की तेजी-मंदी देखी गई है, जो बेहद दुर्लभ है। इस भारी गिरावट के बाद शनिवार को बाजार संभलने की कोशिश कर रहा है। इस तरह के उतार-चढ़ाव में व्यापारियों और निवेशकों को बहुत सावधानी बरतने की जरूरत है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ चांदी की कीमतों में उछाल के पीछे सबसे बड़ा कारण चीन है। इसके तीन प्रमुख वजह मानी जा रही है।
- एक्सपोर्ट पर बैन: दुनिया के 30% चांदी उत्पादन पर नियंत्रण रखने वाले चीन ने निर्यात पूरी तरह बंद कर दिया है।
- स्टॉक रणनीति: चीन अब कच्ची चांदी बेचने के बजाय उससे बने फाइनल प्रोडक्ट्स बेचकर ज्यादा मुनाफा कमाना चाहता है।
- सीमित उत्पादन: चांदी कोई मुख्य खनिज नहीं है, यह कॉपर और जिंक का बाय-प्रोडक्ट है। मांग बढ़ रही है लेकिन उत्पादन सीमित है, जिससे कीमतों में 'बुलिश ट्रेंड' यानी लंबी अवधि की तेजी तय है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक़ जिन घरों में बच्चों की शादियां हैं, उनके लिए अभी खरीदारी करने की सलाह दी जा रही है। उनका मानना है कि सौर पैनल, दवाइयां, ईवी और एआई प्रोडक्ट्स जैसे घरेलू खपत में चांदी की मांग बढ़ने से कीमतें फिर ऊपर जा सकती हैं। मध्यम वर्ग का बजट भले ही डगमगाया है, लेकिन सोना-चांदी भारतीयों के लिए सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि भविष्य की 'वित्तीय सुरक्षा' भी है।
इधर, ज्वेलरी ट्रेड सरकार से बजट में कस्टम ड्यूटी और GSTकम करने की अपेक्षा कर रहा है। कारोबारियों का मानना है कि बिक्री कम होने से लाखों कारीगर बेरोजगार हो रहे हैं। ऐसे में अगर सरकार टैक्स कम करती है, तो सोना-चांदी सस्ता होगा, जिससे आम जनता को राहत मिलेगी और ट्रेड फिर से पटरी पर लौटेगा।