जयपुर

Rajasthan Budget Session: ऑनर किलिंग समेत गहलोत राज के 9 विधेयक राज्यपाल ने लौटाए, जानिए वजह

Rajasthan Budget Session: ऑनर किलिंग समेत गहलोत राज के 9 विधेयक राज्यपाल ने लौटा दिए। जानिए वजह-
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Jan 29, 2026
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जयपुर। राज्यपाल ने 10 विधयेकों के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए उन्हें अलग-अलग कारणों से पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटा दिया है, जिनमें से 9 अशोक गहलोत सरकार के समय विधानसभा से पारित हुए और एक वसुंधरा राजे सरकार के पहले कार्यकाल में 2008 में पारित किया गया था। इसका खुलासा बुधवार को किया गया।

विधानसभा में पेश जानकारी के अनुसार ऑनर किलिंग संबंधी 2019 का विधेयक लौटाते हुए राज्यपाल की ओर से कहा है कि इसमें भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) , 1860 व दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी), 1973 का संदर्भ है, जो अब अस्तित्व में नहीं है और भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 103 में ऑनर किलिंग के अपराध से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं।

इन विधेयक को मिली मंजूरी

विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा ने बुधवार को सदन में यह भी बताया कि पिछले विधानसभा सत्र में पारित राजस्थान भू-जल (संरक्षण और प्रबंध) प्राधिकरण विधेयक-2024, राजस्थान भू-राजस्व (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक-2025, राजस्थान कोचिंग सेंटर (नियंत्रण और विनियमन) विधेयक-2025, राजस्थान विनियोग विधेयक-2025, राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2025, राजस्थान माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2025, राजस्थान मत्स्य क्षेत्र (संशोधन) विधेयक, 2025, राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान, जयपुर विधेयक, 2025 और राजस्थान विधि विरुद्ध धर्म-संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक, 2025 को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है।

सदन को दी दो अध्यादेशों की जानकारी

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने जहां सरकार की ओर से पिछले दिनों लाए गए राजस्थान दुकान और वाणिज्यिक अधिष्ठान (संशोधन) अध्यादेश, 2025 की जानकारी देने के लिए सदन में इसकी प्रति रखी, वहीं संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने राजस्थान जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) अध्यादेश, 2025 को सदन में रखा। उल्लेखनीय है कि इन दोनों अध्यादेशों के स्थान पर इसी सत्र में विधेयक लाए जाएंगे, अन्यथा ये अध्यादेश अस्तित्व खो देंगे।

राज्यपाल पहले भी लौटाते रहे हैं विधेयक

राज्यपाल पहले भी विधानसभा से पारित विधेयक लौटाते रहे हैं। विधेयकों को राज्यपाल उन परिस्थितियों में लौटा देता है, जब राज्य के विधेयक के प्रावधान केंद्रीय कानूनों के प्रावधानों के विपरीत हों।

कानूनों को लेकर स्पष्ट प्रावधान है कि राज्य केवल राज्य सूची के विषयों पर ही कानून ला सकते हैं। समवर्ती सूची में केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं लेकिन केंद्रीय कानून ही प्राथमिकता के साथ मान्य हाेगा। राज्य का कोई कानून केंद्रीय प्रावधानों को नहीं पलट सकता।

वसुंधरा राजे सरकार के समय पारित धर्म स्वातंत्रय विधेयक को तत्कालीन राज्यपाल प्रतिभा पाटिल ने लौटा दिया था। बाद में यह विधेयक नए सिरे से लाया गया, जिसे तत्कालीन राज्यपाल ने राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेज दिया गया और वहां वर्षों तक अटका रहा।

गहलोत राज 9 विधेयक, जो लौटे हैं

  • राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक, 2019 : 5 अगस्त 2019 को पारित
  • राजस्थान सम्मान और परम्परा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध विधेयक,2019 : 5 अगस्त 2019 को पारित
  • कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित
  • कृषक (सशक्तिकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार (राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित
  • आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध और राजस्थान संशोधन) विधेयक, 2020 : 2 नवंबर 2020 को पारित
  • व्यास विद्या पीठ विश्वविद्यालय, जोधपुर विधेयक, 2022 : 4 मार्च 2022 को पारित
  • सौरभ विश्वविद्यालय, हिण्डौन सिटी (करौली) विधेयक, 2022 : 22 मार्च 2022 को पारित
  • राजस्थान विद्युत (शुल्क) विधेयक, 2023 : 2 अगस्त 2023 को पारित
  • नाथद्वारा मंदिर (संशोधन) विधेयक, 2023 : 2 अगस्त 2023 को पारित
Updated on:
29 Jan 2026 06:42 pm
Published on:
29 Jan 2026 05:57 pm