जयपुर

Rajasthan: दादा ने शुरू किया मुकदमा, अब पोते लड़ रहे लड़ाई…63 साल पुराने केस पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

दादा के शुरू किए 63 साल पुराने केस में 3 पीढ़ियों को न्याय नहीं मिला। राजस्थान HC ने सख्त टिप्पणी कर 3 माह में फैसला सुनाने का आदेश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि बेवजह देरी करने पर भारी हर्जाना और अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
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Sep 27, 2026
pending cases in rajasthan high court
राजस्थान हाईकोर्ट में लंबित मामलों पर बड़ा आदेश (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

जयपुर: हाईकोर्ट ने 63 साल पुराने मुकदमे के अभी तक लंबित होने और राजस्व अदालतों में सालों से लंबित मामलों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि न्याय में देरी होना न्याय से इनकार के समान है। न्यायाधीश अनूप कुमार ढंढ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मानव जीवन का दायरा छोटा और सीमित होता है, जबकि मुकदमेबाजी असीमित और अमर होती है। एक व्यक्ति थोड़े समय के लिए जीता है, लेकिन मुकदमे पीढ़ियों तक चलते रहते हैं और उन्हें शुरू करने वाले वादी की भी मृत्यु हो जाती है। अदालत ने कहा कि यह मामला इस कड़वी सच्चाई का एक ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे न्याय मिलने में देरी व्यवस्था का एक गंभीर पहलू बन चुकी है।

मुकदमे से जुड़े कई पक्षों की हो चुकी मृत्यु

पूरा विवाद दौसा के पाटरखेड़ा गांव की भूमि से जुड़ा हुआ है। इस जमीन पर कब्जे को लेकर करीब 63 साल पहले 1963 में आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 145 के तहत कार्यवाही आरंभ हुई थी। इसके बाद से परिवार जमीन के स्वामित्व को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। मामले के मूल पक्षकार जयराम 86 वर्ष के हैं।

इस लंबी अवधि के दौरान मुकदमे से जुड़े कई पक्षों की मृत्यु हो चुकी है, जिसके बाद उनके कानूनी प्रतिनिधियों को रिकॉर्ड पर लेना पड़ा। अदालत ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि इस मानसिकता को बदला जाए, जहां मामले दादाओं द्वारा दायर किए जाते हैं और फैसले उनके पोते सुनते हैं।

इनको भेजी फैसले की प्रति

अदालत ने इस आदेश की एक प्रति अतिरिक्त मुख्य सचिव (कार्मिक विभाग), संभागीय आयुक्त (जयपुर), जिला कलक्टर (दौसा) और रजिस्ट्रार (राजस्व मंडल) को अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है और मामले की अनुपालन रिपोर्ट के लिए 18 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है।

…तो भारी कॉस्ट

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए उपखंड मजिस्ट्रेट, मंडावर, जिला दौसा को कड़े निर्देश दिए हैं कि वह लंबित शिकायत का यथाशीघ्र, तीन महीने के भीतर हर हाल में निस्तारण करें। अदालत ने यह भी चेताया है कि यदि भविष्य में किसी भी पक्ष ने स्थगन के लिए अनावश्यक अनुरोध किया, तो उस पर भारी कॉस्ट लगाई जाएगी। इसके अलावा, संबंधित पीठासीन अधिकारी को चेतावनी दी गई है कि यदि तय सीमा में बिना किसी ठोस कारण के मामला तय नहीं किया गया, तो उच्च स्तर पर प्रतिकूल कार्रवाई की जा सकती है।

ऐसे समझें पेंडिंग मामले

  • बोर्ड ऑफ रेवेन्यू, अजमेर में 72,081 मामले लंबित।
  • 23,744 मामले 10 से 20 साल पुराने।
  • 12,881 मामले 20 से 30 साल पुराने।
  • 103 मामले 30 साल से अधिक पुराने।
  • 102 मामले 40 साल से भी ज्यादा पुराने।
  • राज्य में 6.72 लाख से अधिक मामले विभिन्न राजस्व अदालतों में लंबित।
Updated on:
27 Sept 2026 10:30 am
Published on:
27 Sept 2026 10:30 am