राजस्थान में अक्टूबर महीने में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। प्रदेश के 3 जिलों में 90 प्रतिशत तक फसलें चौपट हो गई।
जयपुर। राजस्थान में अक्टूबर महीने में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। बारिश के चलते प्रदेशभर में खरीफ फसलों को 40 से 50 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। कोटा, झालावाड़ और चित्तौड़गढ़ जिले में 90 प्रतिशत तक फसलों को नुकसान पहुंचा है।
पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के चलते अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में प्रदेशभर में बारिश हुई। कई जिलों में भारी बारिश के चलते खेतों में पानी भर गया। ऐसे में सोयाबीन, ग्वार, मूंग, मोठ, बाजरा और मूंगफली जैसी फसलों को काफी नुकसान हुआ है। बारिश के चलते नई फसलें बर्बाद हो गई।
जानकारी के मुताबिक जयपुर, कोटा, झालावाड़, बारां, अजमेर, सीकर, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा जिले सहित कई जिलों में बारिश से खड़ी फसलें चौपट हो गई। वहीं, कटी हुई फसलें भी खराब हो गई। ऐसे में किसान मंडियों में कम दाम पर अपनी फसल बेचने को मजबूर है।
राजस्थान के कोटा, झालावाड़ और चित्तौड़गढ़ जिले में 90 प्रतिशत तक फसलें बर्बाद हो गई हैं। बाजरा, ग्वार, मूंग और मूंगफली की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा किसानों की सोयाबीन की फसल भी चौपट हो गई।
बेमौसम बारिश से अफीम के खेतों में पानी भर गया। इससे अफीम किसानों पर सीधा असर पड़ेगा। खेत तालाब बनने से बीज सड़ने की आशंका बन रही है। किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है।
इसी तरह दौसा, टोंक, सवाईमाधोपुर और भीलवाड़ा में मूंगफली और बाजरे की फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कई जिलों में तो बारिश के चलते खेत लबालब हो गए हैं और बीज ही बह गया।
राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि प्रदेशभर में फसलों के नुकसान का आंकलन करवा रहे हैं। कोटा, भीलवाड़ा और अजमेर जिले में मूंग, मोठ, ग्वार और बाजरे की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है।
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