जयपुर

शहर का सबसे बेहतरीन सुविधाओं वाला हॉस्पीटल, जहां होती हैं सर्वाधिक मौतें

मौत के आंकडे देखकर रह जाएंगे सन्न

2 min read
Jul 02, 2018
शहर का सबसे बेहतरीन सुविधाओं वाला हॉस्पीटल, जहां होती हैं सर्वाधिक मौतें

विकास जैन/जयपुर. राजधानी में प्रदेश के सर्वाधिक डॉक्टरों और अस्पतालों की मौजूदगी के बावजूद सेहत मापदंडो में पिछडऩे के पीछे महकमे के अधिकारियों और चार बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। विभाग के अधिकारी जिले में संस्थागत प्रसव, शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर की गणना (रिपोर्टिंग) खुद ही नहीं कर पाए, वहीं चार बड़े अस्पतालों ने आंकड़े ही उपलब्ध नहीं करवाए।

हाल ही में विभाग ने जिलों की सेहत मापदंडो के लिहाज से रैंकिंग की थी, जिसमें जयपुर जिला 33 में से 29वें नंबर पर रहा था। चारों बड़े अस्पतालों महिला, जनाना, जेकेलोन और जनाना अस्पताल ने अपने यहां के आंकड़े विभाग को पेश ही नहीं किए। अधिकारी इसका इंतजार करते रहे। एेसे में आंकड़े शामिल किए बिना ही रैंकिंग तैयार भी हो गई। यहां रोजाना जितनी मौतें होती हैं, उतनी तो कई जिलों के कई अस्पतालों में महीने में भी नहीं होती। जिसके कारण बड़े अस्पतालों ने आंकड़े भेजने में रूचि ही नहीं दिखाई।

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बेहतरीन पर सबसे अधिक मौत

महीने में औसतन 1000 शिशुओं की मौत अकेले इसी अस्पताल में हो जाती है। अब प्रदेश के लिहाज से गणना की जाए और अस्पताल इसे उजागर करे तो यह सबसे खराब अस्पताल माना जा सकता है। लेकिन सुविधाओं और उपचार की संख्या के हिसाब से गणना की जाए तो यह सबसे अधिक बेहतर उपचार करने वाला अस्पताल है। इस अस्पताल में सिर्फ जयपुर जिले के ही नहीं, बल्कि प्रदेश के करीब करीब सभी जिलों के मरीज आ रहे हैं। एसएमएस कॉलेज से संबद्ध महिला चिकित्सालय, जनाना अस्पताल, गणगौरी अस्पताल और अन्य छोटे अस्पतालों में रोजाना करीब 200 संस्थागत प्रसव हो रहे हैं। इसके बावजूद जिला इस मापदंड में भी पिछड़ा दिखाया गया।


सीएमएचओ जयपुर प्रथम नरोत्तम शर्मा से सवाल जवाब

सवाल: यह शर्मनाक स्थिति कैसे ?
जवाब: हमारा काम प्रदेश में सबसे बेहतर है, कई योजनाएं तो सिर्फ हमारे यहीं चल रही हंै। सबसे अधिक सुविधाएं और संस्थागत प्रसव हमारे यहां हैं। हम सबसे फिसड्डी कैसे हो सकते हैं।

सवाल: फिर क्या रैंकिंग गलत है?
जवाब: वास्तविकता यह है कि महिला, जनाना, गणगौरी और जेके लोन अस्पताल हमे आंकड़े देते ही नहीं हैं। हमारे पत्रों पर उनकों कोई फर्क नहीं पडता। आंकड़े हम देंगे ही नहीं तो हम फिसड्डी ही रहेंगे।

सवाल: इस गंभीर लापरवाही से किसी स्तर पर अवगत करवाया है?
जवाब: हां

ये बोले कि मांगते तो दे देते

चारों अस्पताल तो स्वयं को रैंकिंग का हिस्सा ही नहीं मान रहे। एसमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. यूएस अग्रवाल का कहना है कि विभाग ने छोटे अस्पतालों में सुविधाओं की रैकिंग की होगी, हमारा इससे क्या मतलब। आंकड़े मांगे गए या नहीं, इसकी जानकारी मुझे नहीं है।

इन्होंने भी कार्रवाई करने के बजाय कारण गिना दिए

जयपुर जिले में काम अच्छा हुआ होगा, लेकिन जिले के अधिकारी अपने काम की रिपोर्टिंग ही पेश नहीं कर पाए। अब जब आंकड़े ही नहीं आएंगे तो जिला पिछड़ेगा ही। हम काम तो बेहतर कर लें, लेकिन उसकी गणना और रिपोर्टिंग ही सही तरीके से नहीं कर पाएंगे तो आंकलन कैसे होगा, हम आगे के लिए सुधार कैसे कर पाएंगे।
-नवीन जैन, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन

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Published on:
02 Jul 2018 03:29 pm
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